अमृत गंगा S4-86

सीज़न 4, अमृत गंगा की छियासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “महात्माओं के सान्निध्य में श्रेष्ठ संस्कार जागते हैं। परंतु इतना ही पर्याप्त नहीं। पूर्णता तक उनकी शिक्षाओं पर चलना होगा।”अम्मा गणेश भजन गाती हैं, ‘मुरली मनोहर।’अम्मा की अमेरिका यात्रा में – वॉशिंगटन डी सी कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-84
सीज़न 4, अमृत गंगा की चौरासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “जहाँ कहीं करुणा का प्रस्फुटन दिखे,उसे ‘माँ’ कहने की परंपरा रही है। मातृत्व की महिमा को समझकर ही हमारी संस्कृति पुष्पित-पल्लवित हुई है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘हरी नारायण जय नारायण।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – वॉशिंगटन डी सी कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-82

सीज़न 4, अमृत गंगा की बयासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “माता-पिता, बुज़ुर्गों और गुरुजनों से मिला अनुशासन ही जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देता है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘राम राम बोलो।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा वॉशिंगटन डी सी की ओर चल पड़ी है।

अमृत गंगा S4-83

सीज़न 4, अमृत गंगा की तिरासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “भिक्षा देते समय इसे ईश्वर-सेवा का अवसर मानते थे। मन में अहंकार नहीं, केवल कृतज्ञता होती थी।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘माँ जगदम्बे (मुझे प्रेम दो)।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – वॉशिंगटन डी सी कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-85

सीज़न 4, अमृत गंगा की पचासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “यह संसार किसी की संपत्ति नहीं, ईश्वर ही इसके स्वामी हैं। यह भूलकर मनुष्य अहम् बढ़ाता है।” अम्मा गणेश भजन गाती हैं, ‘सुखकर्ता तुम हो।’अम्मा की अमेरिका यात्रा में – वॉशिंगटन डी सी कार्यक्रम।