अमृत गंगा S4-91
सीज़न 4, अमृत गंगा की इक्यानवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “कोई कितना भी तपस्वी हो या विद्वान् हो, पूर्णत्व को पाने के लिए पूर्ण गुरु की आवश्यकता होती है।”
अम्मा देवी भजन गाती हैं, ‘अनन्त-सृष्टि-वाहिनि।’
अमृत गंगा S4-91
सीज़न 4, अमृत गंगा की इक्यानवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “कोई कितना भी तपस्वी हो या विद्वान् हो, पूर्णत्व को पाने के लिए पूर्ण गुरु की आवश्यकता होती है।”
अम्मा देवी भजन गाती हैं, ‘अनन्त-सृष्टि-वाहिनि।’
अमृत गंगा S4-90
सीज़न 4, अमृत गंगा की नब्बेवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “गुरु-पूर्णिमा की सच्ची अनुभूति अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा, और समर्पण भाव में है।”
अम्मा भजन गाती हैं, ‘मन रे..सीख प्रभु का होना।’
अम्मा की अमेरिका यात्रा में – न्यूयॉर्क कार्यक्रम।
अमृत गंगा S4-88
सीज़न 4, अमृत गंगा की अट्ठासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “गुरु-पूर्णिमा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि गुरु की दृष्टि और ज्ञान का प्रकाश शिष्य के हृदय में जागृत करने का अवसर है।”
अम्मा शिव भजन गाती हैं, ‘जय बोलो बम बम बोलो ।’
अम्मा की अमेरिका यात्रा में – न्यूयॉर्क कार्यक्रम।
अमृत गंगा S4-89
सीज़न 4, अमृत गंगा की नवासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “गुरु को तर्क से नहीं, श्रद्धा और समर्पण से समझा जा सकता है। जो शिष्य भक्ति और शरणागति में दृढ़ रहता है, उस पर गुरु-कृपा निरंतर बरसती है।”
अम्मा कृष्ण भजन गाती हैं, ‘आँसू भरे नयनों से।’
अम्मा की अमेरिका यात्रा में – न्यूयॉर्क कार्यक्रम।
अमृत गंगा S4-87
सीज़न 4, अमृत गंगा की सत्तासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “जीवन का प्रकाश आशा और प्रेम है। क्रोध और घृणा उसकी छाया हैं। प्रकाश को ही अपनाएँ।” अम्मा देवी भजन गाती हैं, ‘हे कृपामयी अंबे।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा न्यूयॉर्क की ओर चल पड़ी है।