अमृत गंगा S3-17

अमृत गँगा,सीज़न ३ की सत्रहवीं कड़ी में,अम्मा बता रही हैं कि श्रीकृष्ण जैसे अवतारों के माध्यम से हमें ईश्वरानुभूति हो सकती है। उनकी शिक्षाएं और कर्म वेदांत का प्रत्यक्ष प्रमाण होते हैं। वे देश-कालानुसार उपयुक्त धर्म को प्रदर्शित करके, जगत का उत्थान करने आते हैं। अवतार का मुख्य लक्ष्य मानव-हृदय में भगवद्भक्ति को पुनः जागृत करना होता है।

इस कड़ी में अम्मा की भारत यात्रा दिल्ली में जारी है। अम्मा ने भजन गाया है, “आयो रे आयो रे..”

अमृत गंगा S3-16

अमृत गंगा सीज़न ३ की सोलहवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि दुनियां में दो तरह की गरीबी है। एक है प्रेम की गरीबी, दूसरी भोजन और धन की गरीबी। प्रेम की गरीबी भोजन और धन की गरीबी से कहीं बड़ी है। दुःख का प्रतिकारक है प्रेम! प्रेम हो तो दूसरी गरीबी भी नहीं रह जाती। इसलिए, हमें प्रेम बाँटना सीखना चाहिए।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा दिल्ली में जारी है। ‘बीत चला’ – अम्मा यह भजन गा रही हैं।

अमृत गंगा S3-15

अमृत गँगा, सीज़न ३ की १५वीं कड़ी में, अम्मा बता रही हैं कि बस वर्तमान क्षण हमारा है। अगली साँस तक हमारे हाथ में नहीं है। वर्तमान क्षण में किया विवेक, शेष जीवन का निर्णय करता है।इसलिए, विवेक सहित जीना सीखना चाहिए।

इस कड़ी में, अम्मा की यात्रा अमदावाद में जारी है। “शिव शिव हर हर”- यह भजन गा रही हैं अम्मा!

अमृत गंगा S3-14

अमृत गँगा, सीज़न ३ की १४वीं कड़ी में, अम्मा बता रही हैं कि प्रकृति पर्यावरण के संतुलन को बनाये रखती है। उदाहरण के लिए, साँप मांसभक्षी प्राणी हैं और चूहों और मेंढकों की संख्या नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। चीलें और गिद्ध साँपों का भक्षण करते हैं। मनुष्य को इस व्यवस्था में हस्तक्षेप करना बंद करना होगा। हम प्रकृति के पर्यावरण-संतुलन की व्यवस्था का अतिक्रमण कर रहे हैं।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत-यात्रा अमदावाद में जारी है। ‘वाणी मणि माते’ – अम्मा यह भजन गा रही हैं।

अमृत गंगा S3-13

अमृत गँगा, सीज़न ३ की तेरहवीं कड़ी में,अम्मा कह रही हैं कि हमारे अंदर एक सर्विलेंस कैमरा लगा है जो हमारे सब कर्मों को रिकॉर्ड करता है। अपनी अन्तरात्मा की अदालत में जीतने के लिए,कर्मों का अच्छा होना अनिवार्य है। अच्छे कर्मों का अच्छा परिणाम होता है और बुरे कर्मों का बुरा!

इस कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा मुंबई में जारी है। अम्मा ने जो भजन गाया है वो है, जय गणेश.. जय एकदन्त की जय!