अमृत गंगा Specials 1

अमृत गंगा की इस कड़ी में, अम्मा हमें याद दिला रही हैं कि हमारी साधना का लक्ष्य अपनी खोई हुई सरलता को पाना है। सरलता, सहजता द्वारा ही हममें आत्मज्ञान जागृत होगा। अम्मा कहती हैं कि अभी हमारी सरलता, निष्कलङ्कता को अहंकार के धुएँ ने ढक रखा है और इस अहंकार का हमें नाश करना होगा। यहाँ वो हमें फिर एक बार, उदाहरण के लिए विश्वामित्र मुनि की कथा सुना रही हैं।

इस कड़ी में फ्रांस के टूलॉन नगर की यात्रा और उनका भावपूर्ण भजन, जापो नाम।

अमृत गंगा S2-07

अमृत गँगा, सीज़न २ की सातवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि हमारे सपने और योजनाएं हमारे युवा अर्थात तरोताज़ा बनाये रखते हैं और हम में आत्मविश्वास पैदा करते हैं। आत्मविश्वास खो कर, हम मानो सब कुछ खो देंगे। हम सपने तो देखें लेकिन बस सपनों में ही न खोये रहें! कर्म तो करना होगा। फलदाता तो ईश्वर है लेकिन यदि हम उचित कर्म करके उसे अर्पण कर दें तो हमारे कर्म मानो जमाखाते में रहेंगे।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा, पुणे में जारी है। अम्मा का भजन: केशवा नारायणा माधवा गोविन्द।

अमृत गंगा S2-06

अमृत गँगा सीज़न २ की छठी कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि कहीं चोट लगने पर, संभवतः हम दर्द से रो पड़ें। लेकिन रोने-चिल्लाने से घाव तो भरने वाला नहीं; दवा लगानी होगी। कई लोग बिलकुल प्रयत्न नहीं करते। उपयुक्त कर्म नहीं करते। किन्तु, हम समस्याओं का समाधान प्रयत्न द्वारा ही कर सकते हैं, अतः हमें यथायोग्य प्रयत्न करना चाहिए। अपने कर्त्तव्य-कर्मों के बारे में सोच-सोच कर उदास न हों। हमारे हाथ में है – बस वर्तमान क्षण! वर्तमान क्षण में कर्म करने से, हम में आगे बढ़ने योग्य आत्मविश्वास पैदा होता है।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत-यात्रा पुणे-उपमार्ग पर जारी रहेगी। अम्मा इस बार जो भजन गा रही हैं, वो है ..मन रे…

अमृत गंगा S2-05

अमृत गँगा, सीज़न २ की पाँचवीं कड़ी में, अम्मा बता रही हैं कि जगत में रहते-रहते हम वासनाओं का निर्माण कर लेते हैं। लेकिन जब तक वासनाएं हैं, तब तक दुःख भी रहेंगे। जहाँ आग है, वहां धुआँ तो होगा! जब मन का झूला सुख की ओर जा रहा होता है, तब दुःख की ओर जाने की तैयारी होती है, clock के pendulum की तरह। दुःख आये तो हमें practical होना चाहिए। उचित कर्म करने चाहियें। जीवन में अनेकों समस्याएं आ सकती हैं लेकिन हमें उन पर विजय पाने के उपाय ढूंढने होंगे।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत-यात्रा हैदराबाद की ओर जारी रहेगी। भजन – राम हमारे शाम हमारे!

अमृत गंगा S2-04

अमृत गंगा-सीज़न २ की चौथी कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हम दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपनी ओर देखें। हम अपनी गलतियों को देखें तो माइक्रोस्कोप से, जबकि दूसरों को टेलिस्कोप द्वारा। जब हम किसी से नाराज़ हों तो उसे अपनी ही कमियाँ दिखाने वाले आईने की तरह देखा करें। अम्मा कहती हैं कि अपनी आदतों में परिवर्तन लाना है तो हमें अर्चना, जप व ध्यान जैसे साधनों को अपनाना होगा।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत-यात्रा का कारवाँ हैदराबाद की ओर चल पड़ा है। अम्मा का भजन – वेंकटरमणा..