Category / अमृतगंगा

अमृत गंगा S4-69 सीज़न 4, अमृत गंगा की उनहत्तरवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “ज्ञान–अज्ञान और धर्म–अधर्म के बीच विवेक जागृत कर अंतर्मन के शिव को प्रकट करने तथा शाश्वत चेतना को अंगीकार करने का आह्वान ही शिवरात्रि है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘व्रजवन कुंजविहारी।’

अमृत गंगा S4-68 सीज़न 4, अमृत गंगा की अड़सठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “अशांत मन समस्याएँ बढ़ाता है, जबकि शांत मन विवेक से समाधान खोजने में मदद करता है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘समस्त पाप नाशनं।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – लॉस एंजेलेस कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-67 सीज़न 4, अमृत गंगा की सड़सठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “अज्ञान से अंधे लोग स्वार्थपूर्ण कर्म करते रहते हैं—महाभारत भी यही दर्शाती है। धृतराष्ट्र का अंधापन ही उस महायुद्ध का कारण बना।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘हे कृपामयी अंबे ।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – लॉस एंजेलेस कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-66 सीज़न 4, अमृत गंगा की छियासठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “प्रेम के अनंत सौंदर्य की झलक मिलते ही हम चुनौतियों के आगे नहीं झुकेंगे; दुःख और बोरियत हमें छू नहीं पाएँगे, और जीवन सदा तरोताज़ा रहेगा।।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘राधे श्याम कृष्ण नाम।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – लॉस […]

अमृत गंगा S4-65 सीज़न 4, अमृत गंगा की पैंसठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “धीर व्यक्ति अहंकारी नहीं होता। प्रेम, विनय, करुणा और निस्वार्थ भाव उसके लक्षण हैं—और यही गुण एक सच्चे भक्त में होते हैं।”अम्मा भजन गाती हैं, ‘कर लो नैया पार। ’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – यात्रा लॉस एंजेलेस की ओर।