अमृत गंगा S2-05

अमृत गँगा, सीज़न २ की पाँचवीं कड़ी में, अम्मा बता रही हैं कि जगत में रहते-रहते हम वासनाओं का निर्माण कर लेते हैं। लेकिन जब तक वासनाएं हैं, तब तक दुःख भी रहेंगे। जहाँ आग है, वहां धुआँ तो होगा! जब मन का झूला सुख की ओर जा रहा होता है, तब दुःख की ओर जाने की तैयारी होती है, clock के pendulum की तरह। दुःख आये तो हमें practical होना चाहिए। उचित कर्म करने चाहियें। जीवन में अनेकों समस्याएं आ सकती हैं लेकिन हमें उन पर विजय पाने के उपाय ढूंढने होंगे।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत-यात्रा हैदराबाद की ओर जारी रहेगी। भजन – राम हमारे शाम हमारे!

अमृत गंगा S2-04

अमृत गंगा-सीज़न २ की चौथी कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हम दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपनी ओर देखें। हम अपनी गलतियों को देखें तो माइक्रोस्कोप से, जबकि दूसरों को टेलिस्कोप द्वारा। जब हम किसी से नाराज़ हों तो उसे अपनी ही कमियाँ दिखाने वाले आईने की तरह देखा करें। अम्मा कहती हैं कि अपनी आदतों में परिवर्तन लाना है तो हमें अर्चना, जप व ध्यान जैसे साधनों को अपनाना होगा।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत-यात्रा का कारवाँ हैदराबाद की ओर चल पड़ा है। अम्मा का भजन – वेंकटरमणा..

अमृत गंगा S2-03

अमृत गंगा के सीज़न २ की तीसरी कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हृदय में प्रेम हो तो सर्वत्र सौन्दर्य ही सौन्दर्य दिखाई देता है। प्रेम के अभाव में, विश्व-सुन्दरी भी हमें कुरूप मालूम हो सकती है। कारण है अपना मन! जो हमें भाता हो, हो सकता है, दूसरे को बिल्कुल न भाये। आनन्द वस्तु में नहीं, हमारे अपने मन में होता है। मन के स्वभाव पर ध्यान दें। भगवान से प्रेम करने वाली गोपियों का उदाहरण लो! उन्हें जहाँ-तहाँ सौन्दर्य ही दिखाई देता था। वो जहाँ जातीं, जहाँ देखतीं, उन्हें सबमें भगवान के दर्शन होते थे।

प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में बेंगलुरु कार्यक्रम। इस कड़ी में आप अम्मा के साथ ‘श्याम सुन्दर मदन मोहन ‘ – यह भजन गा सकेंगे!

अमृत गंगा S2-02

अमृत गंगा सीजन 2 की दूसरी कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि हमें जगत में यूँ रहना चाहिए कि जगत हम में प्रवेश न करने पाए। जगत और इसकी वस्तुएं हमारे दुःख का कारण नहीं बल्कि अपना मन ही दुःख का मूल है। हमें अपनी इच्छाओं,वासनाओं के स्वभाव को समझना चाहिए। वे पूरी हों या न हों,किन्तु परिणाम दुःख ही होता है। मन एक ही इच्छा पर रुकता नहीं, दूसरी भी कतार में प्रतीक्षा कर रही हैं! पूरी न हों तो दुःख प्रतीक्षा कर रहा है! हमें सावधान रहना चाहिए कि मन में अनावश्यक विचारों और इच्छाओं को टिकने न दें।

प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा बेंगलुरु से आरम्भ हो रही है। इसी कड़ी में, आप अम्मा को भजन गाते सुनेंगे, ‘वृन्दावन के सुन्दर बाला..’

अमृत गंगा S2-01

अमृत गंगा सीजन 2 की पहली कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हम आत्म-जगत में प्रवेश करें! ऐसा तभी हो सकता है यदि हमारे अहम् में कमी आये। अहंकार को छोड़ कर,शेष सब ईश्वर-सृष्टि है। अहंकार, हमारी अपनी सृष्टि है। हमीं ने इसे रचा है और हमें ही इसे मिटाना होगा। हम अहंकार के इस बुलबुले को पकडे रखते हैं जो कभी भी फूट सकता है। हमें अपनी समझ और मनोभाव में परिवर्तन लाना चाहिए।
प्रस्तुत कड़ी में, हम अम्मा की सम्पूर्ण भारत की यात्रा पर निकलेंगे। इस कड़ी में आप अम्मा के साथ ‘हरि ॐ नमो नारायणा’ – यह भजन गा सकेंगे!