अमृत गंगा S4-77

सीज़न 4, अमृत गंगा की सतहत्तरवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “अमरत्व के लिए ‘मैं’ का भाव मिटाना होगा; वरना दान और यज्ञ भी मुक्ति नहीं दे सकते।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘यदुपति मनहारी।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – डालस कार्यक्रम।