अमृत गंगा Specials 3

अमृत गंगा की इस कड़ी.. अम्मा हमें शास्त्रों और आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने को प्रोत्साहित करती हैं; क्योंकि उनसे हमें शिक्षा मिलती है कि महात्माओं ने जीवन में आने वाली परिस्थितियों का कैसे सामना किया। युग कोई भी हो, हमें महाभारत और रामायण से मिलती-जुलती घटनाएं देखने को मिलती रहेंगी। जहाँ-तहाँ, इन ग्रंथों में वर्णित पात्रों जैसे लोग मिलेंगे। हम उनसे सीख सकते हैं कि ऐसी ही परिस्थितियों से वे महात्मा लोग जैसे उबरे। लेकिन हम कितना भी पठन-पाठन कर लें, हमारे लिए आवश्यक हो जाता है कि हम तत्त्वनिष्ठ महात्माओं या गुरुओं से आभ्यासिक शिक्षा प्राप्त करें।

इस कड़ी में आगे चल कर, अम्मा की लन्दन-यात्रा और उनका भावपूर्वक गाया हुआ गुजराती भजन… ‘मीठी मधुरी’ प्रस्तुत है।

अमृत गंगा Specials 2

अमृत गंगा की इस कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि अपने में परिवर्तन लाने के लिए, हमें राह नहीं देखनी कि पहले दूसरे बदलें। बल्कि, पहले हम बदलें और दूसरों के लिए प्रेरणा-स्रोत बनें। हमारा प्रत्येक सत्कर्म, प्रत्येक सुविचार कई गुणा फल देगा। जब हमारे हृदय में अरुणोदय होगा तो उसका प्रकाश सबको स्पष्ट दिखाई देगा।

इस कड़ी में अम्मा की मिलान(इटली) की यात्रा व पंजाबी भाषा में उनका गाया हुआ भावपूर्ण भजन, मैय्याजी मेनू तू चाहिदी… प्रस्तुत है।

अमृत गंगा Specials 1

अमृत गंगा की इस कड़ी में, अम्मा हमें याद दिला रही हैं कि हमारी साधना का लक्ष्य अपनी खोई हुई सरलता को पाना है। सरलता, सहजता द्वारा ही हममें आत्मज्ञान जागृत होगा। अम्मा कहती हैं कि अभी हमारी सरलता, निष्कलङ्कता को अहंकार के धुएँ ने ढक रखा है और इस अहंकार का हमें नाश करना होगा। यहाँ वो हमें फिर एक बार, उदाहरण के लिए विश्वामित्र मुनि की कथा सुना रही हैं।

इस कड़ी में फ्रांस के टूलॉन नगर की यात्रा और उनका भावपूर्ण भजन, जापो नाम।

अमृत गंगा S2-07

अमृत गँगा, सीज़न २ की सातवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि हमारे सपने और योजनाएं हमारे युवा अर्थात तरोताज़ा बनाये रखते हैं और हम में आत्मविश्वास पैदा करते हैं। आत्मविश्वास खो कर, हम मानो सब कुछ खो देंगे। हम सपने तो देखें लेकिन बस सपनों में ही न खोये रहें! कर्म तो करना होगा। फलदाता तो ईश्वर है लेकिन यदि हम उचित कर्म करके उसे अर्पण कर दें तो हमारे कर्म मानो जमाखाते में रहेंगे।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा, पुणे में जारी है। अम्मा का भजन: केशवा नारायणा माधवा गोविन्द।

अमृत गंगा S2-06

अमृत गँगा सीज़न २ की छठी कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि कहीं चोट लगने पर, संभवतः हम दर्द से रो पड़ें। लेकिन रोने-चिल्लाने से घाव तो भरने वाला नहीं; दवा लगानी होगी। कई लोग बिलकुल प्रयत्न नहीं करते। उपयुक्त कर्म नहीं करते। किन्तु, हम समस्याओं का समाधान प्रयत्न द्वारा ही कर सकते हैं, अतः हमें यथायोग्य प्रयत्न करना चाहिए। अपने कर्त्तव्य-कर्मों के बारे में सोच-सोच कर उदास न हों। हमारे हाथ में है – बस वर्तमान क्षण! वर्तमान क्षण में कर्म करने से, हम में आगे बढ़ने योग्य आत्मविश्वास पैदा होता है।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत-यात्रा पुणे-उपमार्ग पर जारी रहेगी। अम्मा इस बार जो भजन गा रही हैं, वो है ..मन रे…