अमृत गंगा 32

अमृत गंगा की आज बत्तीसवीं कड़ी में अम्मा बता रही हैं कि हमें अनावश्यक विचारों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। विचार तो आते-जाते रहेंगे लेकिन हमें उन्हें गहरे नहीं जाने देना चाहिए। अगर उन्होंने डेरा डाल लिया तो फिर उन्हें उखाड़ फेंकना कठिन हो जायेगा। हम छोटी पौध को तो आसानी से उखाड़ सकते हैं लेकिन किसी पेड़ की जड़ें जब गहरी चली जाती हैं तो उसे उखाड़ना मुश्किल हो जाता है। हम देह-मन-बुद्धि के स्तर पर रह रहे हैं। इसकी बजाय, हमें अन्तर्मुखी होना चाहिए।

इस कड़ी में, अम्मा की सिंगापुर यात्रा जारी है। और इसी कड़ी में सुनिए, अम्मा का गाया हुआ भजन..दुर्गे दुर्गतिहरणे

अमृत गंगा 31

अमृत गंगा की प्रस्तुत इकतीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि क्षमा करना आसान तो नहीं, पर हमें कोशिश करनी चाहिए। अक्सर, हम दोनों तरफ़ की कहानी तो सुनते नहीं; दोनों को सुनने के बाद ही कुछ निर्णय लेना चाहिए। एक ही पक्ष की बात सुन कर, जल्दबाज़ी और तैश में आ कर फ़ैसला करना ठीक नहीं होता। दोनों तरफ़ की बात सुनने के बाद ही, हम स्थिति को समझ सकते हैं। बीती बातों को विवेकपूर्वक भुला कर, हमें क्षमा कर देना चाहिए।

इस कड़ी में, आप आनन्द लेंगे, अम्मा सिंगापुर की यात्रा का और अम्मा के गाये भजन, जय जय माता.. का!

अमृत गंगा 30

अमृत गंगा की तीसवीं कड़ी… अम्मा यहाँ बता रही हैं कि मन विचित्र है! हम पुरानी चीज़ों से ऊब कर, नई खोजते रहते हैं। यहाँ तक कि अपने सम्बन्धों से भी ऊब जाते हैं। बस…नहीं ऊबते तो अपने विचारों से! कई लोगों को तो अपने बचपन की फ़िज़ूल की चीज़ें तक याद रहती हैं। दूसरों ने उनसे क्या कहा,उनके साथ क्या किया..वे इससे आगे बढ़ ही नहीं पाते। लेकिन ऐसा कोई नहीं, जिससे कभी कोई गलती न हुई हो। अम्मा कहती हैं, हम सब से गलतियां होती हैं, इसलिए हमें भुलाना और क्षमा करना आना चाहिए।

इस कड़ी में, अम्मा की मेलबॉर्न, ऑस्ट्रेलिया की यात्रा जारी है। अम्मा भजन भी गा रही हैं..मुरली मनोहर माधवा…

अमृत गंगा 29

अमृत गंगा की उनतीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हम उन समस्याओं से चिपके रहते हैं, जिनका अस्तित्व है ही नहीं और फिर शिकायत करते हैं कि हमसे यह बोझ ढोया नहीं जाता। बोझा उठाने से पहले ही हम शिकायत करने लगते हैं कि बड़ा भारी है! चिंता करने की कोई बात न हो, तब भी हम सोचते रहते हैं..कुछ बुरा होने वाला है। पति को घर आने में देरी हो जाये तो पत्नी चिंता करने लगती है। सोचती है, कहीं एक्सीडेंट न हो गया हो, कहीं हार्ट अटैक तो नहीं हो गया या किसी और बड़ी मुसीबत में तो नहीं पड़ गए! यही सोच-सोच कर वो tension में आ जाती है। इस प्रकार, भय हमें कमज़ोर बना कर मानसिक समस्याएं खड़े कर देता है।

इस कड़ी में, हम अम्मा की मेलबॉर्न, ऑस्ट्रेलिया की यात्रा देखेंगे और अंत में, अम्मा गा रही हैं एक मधुर, मनोहर भजन.. शेर पे सवार..

अमृत गंगा 28

अमृत गंगा की प्रस्तुत अट्ठाईसवीं कड़ी में, हम अम्मा के शब्दों में ही अम्मा की, एक महान व्यक्ति की परिभाषा को देखें तो वो कुछ इस तरह है कि जो व्यक्ति अपने विचारों, वचनों और कर्मों के माध्यम से दूसरे कितने लोगों के जीवन पर गहरी और सुन्दर छाप छोड़ पाया है। अपने प्रेम और करुणा जैसी सुन्दर भावनाओं से, उसने कितनों के जीवन को खूबसूरत बनाया है! यही गुण हमारा सारतत्त्व हैं। लेकिन हमने अपने सत्स्वरूप को स्वार्थ से ढक रखा है। हम वस्तुओं के दास बन कर रह गए हैं..हमारी प्राथमिकताएं उलट गई हैं।

इस कड़ी में, हम अम्मा की, सिडनी..ऑस्ट्रेलिया की यात्रा और साथ ही अम्मा के गाये भजन, ‘भाव फुलांची..’ का आनन्द लेंगे।