अमृत गंगा S2-39

अमृत गँगा सीज़न २ की उनतालीसवीं कड़ी में, अम्मा गुरु-शिष्य सम्बन्ध को अलौकिक व उत्कृष्ट बता रही हैं। वो कहती हैं कि यह सबसे उदात्त सम्बन्ध है, जिसमें रंचमात्र भी स्वार्थ नहीं है..माँ-बच्चे सम्बन्ध से भी कहीं बढ़ कर! एक ओर है कृपा और वात्सल्य तो दूसरी ओर पूर्ण समर्पण और दास्य-भाव का गहन प्रेम! आदर्श गुरु-शिष्य सम्बन्ध अर्थात् हृदयों का ऐक्य!

इस कड़ी में अम्मा को आप देखेंगे उत्तरी अमेरिकी यात्रा के न्यू-यॉर्क नगर में! साथ ही इस कड़ी में अम्मा के गाये भजन,’जहाँ देखूं वहाँ..’ का आनन्द पाइए!

अमृत गंगा S2-38

अमृत गँगा सीज़न २ की अड़तीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि अगर हममें अच्छा शिष्य बनने की उत्कण्ठा है तो हमें अपने गुरु को अपना घनिष्ठ मित्र समझना चाहिए। एक अच्छे, सच्चे मित्र की बात मानना हमारे लिए आसान होता है। उसकी बात हम खुले ह्रदय और पूरी एकाग्रता के साथ सुनते हैं। धीरे-धीरे शिष्यत्व भक्ति एवं समर्पण का रूप ले लेता है। मित्रता प्रेम पर आधारित होती है। यह प्रेम का आधार है;दो नहीं एकमात्र है! राधा कृष्ण हो गई और कृष्ण राधा! अध्यात्म में द्वैत के लिए कोई स्थान नहीं!

इस कड़ी में अम्मा की उत्तरी अमेरिकी यात्रा जार्जिआ में एटलांटा पहुंची है। इसी कड़ी में अम्मा जो भजन गए रही हैं वो है, हे कृपामयी अम्बे..

अमृत गंगा S2-37

अमृत गँगा सीज़न २ की सैंतीसवीं कड़ी में, अम्मा अच्छे स्वास्थ्य और धन-सम्पत्ति दोनों का महत्त्व बता रही हैं। हमारे पास धन-दौलत हो भी तो अच्छे स्वास्थ्य के अभाव में हम उसका आनन्द नहीं उठा सकेंगे। धन और स्वास्थ्य दोनों हों, तब भी जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वस्थ मन का होना आवश्यक है। अतः मन को स्वस्थ रखना चाहिए। और यह केवल अध्यात्म के द्वारा संभव है।

इस कड़ी में अम्मा की उत्तरी अमेरिकी यात्रा शिकागो पहुंची है। इसी कड़ी में अम्मा जो भजन गए रही हैं वो है,माँ जय जगदम्बे माँ..

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अमृत गंगा S2-36

अमृत गँगा, सीज़न २ की छत्तीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हम नए वर्ष के आरम्भ होते संकल्प तो अक्सर लेते हैं लेकिन अपनी पुरानी आदतों और वासनाओं के कारण उन्हें पूरा नहीं कर पाते। हम उन आदतों को छोड़ने को तैयार नहीं किन्तु जब तक उन्हें छोड़ते नहीं, परिवर्तन असम्भव है! कितना भी कठिन लगे, पर पुरानी आदतों को छोड़ना तो पड़ेगा ही। हमें आगे बढ़ने का दृढ संकल्प लेना चाहिए। जैसे हम शरीर की शुद्धि के लिए रोज़ स्नान करते हैं, वैसे ही मन के लिए उत्साह स्नान जैसा है। केवल नए वर्ष के दिन ही नहीं बल्कि पूरे वर्ष में प्रतिदिन इस उत्साह-उमंग को बनाये रखना चाहिए।

इस कड़ी में अम्मा की उत्तरी अमेरिकी यात्रा डैलस में पहुंची है। इसी कड़ी में, अम्मा के संग गाइये भजन: मंगल वदना…

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अमृत गंगा S2-35

अमृत गँगा सीज़न २ की पैंतीसवीं कड़ी में,अम्मा कह रही हैं कि जैसे सब जगह कैमरे लगे हैं,वैसे ही हमारे भीतर भी एक कैमरा है..हमारी अंतरात्मा का कैमरा! यह हमारे सब कर्मों को रिकॉर्ड करता है। ईश्वर हमारे अंदर है पर हम राग-द्वेष व काम- क्रोध के वशीभूत हो,उसे अनुभूत नहीं कर पाते। साधक होने के नाते हम प्रत्येक परिस्थिति को साक्षी भाव से देख सकते हैं। हमारी प्रतिक्रिया निर्भर करती है इस बात पर कि हम तत्त्व को कितना समझे हैं!

इस कड़ी में,अम्मा की उत्तरी अमेरिकी यात्रा को देखिये सैंटा फ़े,न्यू मैक्सिको में और उनके साथ भजन गाइये.. गोपाल कृष्णा, गिरिधारी कृष्णा!