अमृत गंगा S2-28

अमृत गँगा,सीज़न २ की अट्ठाईसवीं कड़ी में,अम्मा कहती हैं कि अनुशासन की आवश्यकता हमारे अपने हितार्थ है। शरीर और मन को उपयोगी पात्र होना चाहिए। यदा-कदा उपवास करने से शरीर के भीतरी अवयवों की शुद्धि होती है। अंतःकरण की शुद्धि के लिए यम-नियम के पालन की आवश्यकता होगी।

इस कड़ी में अम्मा की यूरोप यात्रा फ़िनलैंड पहुँच गई है। इस कड़ी में अम्मा जो भजन गा रही हैं.वो है..मेरे ह्रदय श्रीराम..

अमृत गंगा S2-24

अमृत गँगा सीज़न २ की चौबीसवीं कड़ी में, अम्मा नवरात्रों को एक पूर्णोत्सव बता रही हैं..भक्ति, व्रत-उपवास, पूजा और समर्पण-भाव का सम्पूर्ण मिश्रण! अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश में हमारे प्रवेश को, यह परम-विजय के रूप में दर्शाता है। नवरात्रि के तत्त्व को ग्रहण करके हम परमात्म-बोध को प्राप्त हो सकते हैं। इस कड़ी में, अम्मा यूरोप यात्रा के दौरान लंदन में पहुंची हैं।

इस कड़ी में अम्मा पंजाबी भजन गा रही हैं, “माता राणी ने किरपा बरसाई…”

अमृत गंगा S2-23

अमृत गँगा सीज़न २ की २३वीं कड़ी में, अम्मा नवरात्रि की चर्चा जारी रखे हैं। ये पावन दिन, हमें अपने मन में छिड़े दैवी और आसुरी शक्तियों के बीच नित्य युद्ध की याद दिलाते हैं। हमारे प्रयत्न विजय के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ईश्वर-कृपा भी आवश्यक है। नवरात्र प्रत्येक प्राणी के अंदर दैवी कृपा की जागृति के द्योतक हैं। ये केवल उत्सव मनाने का नहीं बल्कि साधना, पूजा और व्रत-उपवास का समय भी है। यह समय ससीम जगत से असीम की ओर ऊर्ध्वगति करने का प्रतीक है। इस कड़ी में, अम्मा की यूरोप यात्रा मिलान, इटली में जारी रहेगी।

इसी कड़ी में अम्मा के मुख से भजन सुनिए, ‘विहरति यमुना तट में..’

अमृत गंगा S2-22

अमृत गँगा सीज़न २ की बाईसवीं कड़ी में, अम्मा नवरात्रि के विषय में बताते हुए कह रही हैं कि देवी माँ की पूजा की नौ रातें मात्र धार्मिक आचार नहीं। इसे विज्ञान और वैश्विक सत्य का समर्थन भी प्राप्त है। हम न केवल देवी माँ के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं बल्कि सारी सृष्टि हमारे लिए पूज्य है। सकल सृष्टि की उत्पत्ति उस असीम दिव्य गर्भ से हुई है और यह मातृभाव हम सबमें सुप्त अवस्था में पड़ा है। हर स्त्री उसी शक्ति की मूर्ति है। देवी की सहिष्णुता सब मनुष्यों में ही नहीं, सृष्टि के सब प्राणियों में निहित है। नवरात्रि हमारे भीतर पड़े उस स्वभाव को जागृत करने का समय है।

इस कड़ी में, अम्मा की यूरोप-यात्रा स्विटज़रर्लैंड के विंटरथर में जारी रहेगी। इसी कड़ी में अम्मा जो भजन गा रही हैं,वो है..मोरपंख सिर पे…

अमृत गंगा S2-21

अमृत गँगा सीज़न २ की इक्कीसवीं कड़ी में अम्मा कहती हैं कि बुरी वासनाओं पर विजय पाना कठिन है। मन में बुरे विचारों की चिंगारी उठते ही, उसे बुझाना आसान होता है। लेकिन उन्हें शीघ्र न बुझाया जाये तो भयानक और विनाशकारी आग का रूप ले सकती हैं। हम उन्हें शुरुआत में नियंत्रित न भी कर सकें तब भी उन्हें पालना या कुचलना हमारे हाथ में है। ऐसे अनुभवों पर मनन करके हम उनसे सीख सकते हैं। गुरु हमारे मार्ग में आने वाली बाधाओं की ओर संकेत करके और उनसे ऊपर उठ कर आगे बढ़ने में हमारी मदद करते हैं। सत्संग इसीलिये महत्त्वपूर्ण है।

इस कड़ी में अम्मा अपनी यूरोप-यात्रा में टूलॉन, फ़्रांस में हैं। यहाँ आप अम्मा को ‘शम्भो शंकर’- यह भजन गाते सुनेंगे।