अमृत गंगा S2-35

अमृत गँगा सीज़न २ की पैंतीसवीं कड़ी में,अम्मा कह रही हैं कि जैसे सब जगह कैमरे लगे हैं,वैसे ही हमारे भीतर भी एक कैमरा है..हमारी अंतरात्मा का कैमरा! यह हमारे सब कर्मों को रिकॉर्ड करता है। ईश्वर हमारे अंदर है पर हम राग-द्वेष व काम- क्रोध के वशीभूत हो,उसे अनुभूत नहीं कर पाते। साधक होने के नाते हम प्रत्येक परिस्थिति को साक्षी भाव से देख सकते हैं। हमारी प्रतिक्रिया निर्भर करती है इस बात पर कि हम तत्त्व को कितना समझे हैं!

इस कड़ी में,अम्मा की उत्तरी अमेरिकी यात्रा को देखिये सैंटा फ़े,न्यू मैक्सिको में और उनके साथ भजन गाइये.. गोपाल कृष्णा, गिरिधारी कृष्णा!

अमृत गंगा S2-34

अमृत गँगा सीज़न २ की चौंतीसवीं कड़ी में,अम्मा कह रही हैं कि ईश्वर कोई व्यक्ति नहीं जो एक को दंड दे और दूसरे को क्षमादान! साथ ही,इसका यह अभिप्राय भी नहीं कि हम मनमाना जीवन जियें!कि मैं जैसे चाहूँ,जिऊंगा!” यही मनोभाव सब मुसीबतों की जड़ है। इस मनोभाव से न तो ‘हमें’ सुख-शांति की प्राप्ति होती है और न ही समाज को। राग और द्वेष परस्पर साथी हैं। अपनी इच्छा/अनिच्छा अनुसार जीवन जीना दुर्घटनाओं को जन्म दे सकता है। दूध अच्छा लगता है लेकिन फट जाये तो अच्छा नहीं लगता और हम इसे फेंक देते हैं। लेकिन हम अपनी अंतरात्मा के न्यायालय से बच नहीं सकते।

इस कड़ी में अम्मा की उत्तरी अमेरिकी यात्रा, कैलिफ़ोर्निया के लॉस एंजेलेस में पहुंची है। इसी कड़ी में अम्मा का गाया भजन सुनिये, वृन्दावन कुञ्जविहारी…

अमृत गंगा S2-33

#अमृतगँगा सीज़न २ की तैंतीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि जीवन में कठिनाइयों के आने पर हमें निरुत्साहित नहीं होना चाहिए। हमें अपना आत्मविश्वास और मनोबल नहीं खोना चाहिए। ये हमारी सच्ची सम्पत्ति हैं। इन्हें खोया तो मानो सब खो दिया। इसलिए हमें प्रतिकूल विचारों को स्थान ही नहीं देना चाहिए। यदि हम जान लें कि हम अनन्त शक्ति का स्रोत हैं तो सब विघ्न-बाधाओं को पार कर लेंगे।

इस कड़ी में अम्मा की उत्तरी अमेरिकी यात्रा सैन रेमॉन, कैलिफ़ोर्निया पहुँची है। इसी कड़ी में भजन सुनिए..हरे कृष्ण कृष्णा..

अमृत गंगा S2-32

अमृत गँगा सीज़न २ की बत्तीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि प्रतिक्षण अनमोल है। प्रतिपल हम मृत्यु की ओर अग्रसर हैं! जो यह जानता है, वो सावधान रहेगा। हृदय और मन को युगपत कर्म करना चाहिए। मन में और अधिक विशालता और सूक्ष्मता आये! अध्यात्म-चिंतन व साधना महत्त्वपूर्ण हैं। ईश्वर हमसे प्रकृति माध्यम से बात करता है किन्तु उसे समझने के लिए हम में धर्म व नीति का समुचित बोध होना आवश्यक है।

इस कड़ी से, अम्मा की उत्तरी अमेरिका की यात्रा का श्रीगणेश सियाटल, वाशिंगटन से होने जा रहा है। इसी कड़ी में अम्मा का गाया भजन सुनिए, शिबजी भोला

अमृत गंगा S2-31

अमृत गँगा सीज़न २ की इक्तीसवीं कड़ी में,अम्मा कहती हैं कि कर्म में शुद्धि को सच्ची प्रार्थना कहा जायेगा,अन्यथा यह सच्ची प्रार्थना नहीं। प्रार्थना का आधार हो,आध्यात्मिक तत्त्व का ज्ञान! प्रार्थना तो हम सभी करते हैं लेकिन उसमें गहरे नहीं जाते या यथेष्ट प्रयत्न नहीं करते। अपनी भूलों को सुधारने का प्रयत्न नहीं करते। हमारी प्रार्थना हो कि हम किसी को विचारों,दृष्टि या कर्म से दुःख न पहुंचाएं! हम चाहते हैं कि हमारी प्रार्थनाएं सुनी जाएँ लेकिन हमें स्वयं अपनी प्रार्थनाओं को सुनना चाहिए।

इस कड़ी में अम्मा की यात्रा जापान की ओर चली है! अम्मा का गाया भजन,’आओ मेरे नन्दलाल’ भी सुनिए इसी कड़ी में!