अमृत गंगा S4-87

सीज़न 4, अमृत गंगा की सत्तासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “जीवन का प्रकाश आशा और प्रेम है। क्रोध और घृणा उसकी छाया हैं। प्रकाश को ही अपनाएँ।” अम्मा देवी भजन गाती हैं, ‘हे कृपामयी अंबे।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा न्यूयॉर्क की ओर चल पड़ी है।

अमृत गंगा S4-81

सीज़न 4, अमृत गंगा की इक्यासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “यदि मन में प्रेम, करुणा और जीवन-मूल्य हों, तो सर्वत्र सौंदर्य का ही दर्शन होगा।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘नमः शिवाय ॐ।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – एटलांटा कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-80

सीज़न 4, अमृत गंगा की अस्सीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “अहंकार से मुक्त होने पर ही हम स्वतंत्र होते हैं। तब हम अच्छे-बुरे, दोनों का ही एक समान मुस्कुराके स्वागत कर सकेंगे।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘कुछ न लें आया तू।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – एटलांटा कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-79

सीज़न 4, अमृत गंगा की उनहत्तरवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “प्रत्येक कर्म में awareness लाना ही सनातन धर्म के अलग अलग आध्यात्मिक और धर्माचरणों का उद्देश्य है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘जय जय काली माँ..।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा एटलांटा की ओर चल पड़ी है।

अमृत गंगा S4-78

सीज़न 4, अमृत गंगा की अठहत्तरवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “प्रेम, एकता, विनम्रता, करुणा और भक्ति का दीप जलाएँ; इससे हमारा और आसपास के सभी का हृदय संतोष, आनंद और शांति से भर जाएगा।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘जपो रे जपो रे..।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – डालस कार्यक्रम।