अमृत गंगा S4-83

सीज़न 4, अमृत गंगा की तिरासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “भिक्षा देते समय इसे ईश्वर-सेवा का अवसर मानते थे। मन में अहंकार नहीं, केवल कृतज्ञता होती थी।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘माँ जगदम्बे (मुझे प्रेम दो)।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – वॉशिंगटन डी सी कार्यक्रम।