अमृत गंगा S2-45

अमृत गँगा की पैंतालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि परमात्मा शुभ-मंगल की निधि हैं। जहाँ-जहाँ परमात्म-विचार होगा, वहां-वहां समृद्धि और गुण होंगे ही। प्रत्येक व्यक्ति में प्रबल विवेक और ईश्वरार्पण-बुद्धि नहीं होती। जहाँ कुछ चर-अचर प्राणी ज्ञान की घोर निद्रा में डूबे रहते हैं, वहीं ईश्वर-स्मरण में मस्त व्यक्ति के लिए प्रतिदिन शिवरात्रि है।

इस कड़ी में, अम्मा की यात्रा का ‘सिंगापुर’ भाग देखिये। इस कड़ी में अम्मा जो भजन गा रही हैं, वो है.. कैसा संदेशा…

अमृत गंगा S2-46

अमृत गँगा,सीज़न २, की छियालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि प्रायः,हम ईश्वर को केवल दुःख के समय पुकारते हैं; इसीलिये दुःख हमें ईश्वर के समीपतर ले जाता है! ऐसा तभी संभव है यदि दुःख-मुसीबत में हमारा बोध बना रहे! यदि हमारे ह्रदय में बाल-सुलभ निष्कलङ्कता लिए प्रार्थना करेंगे तो निश्चय ही, ईश्वर-कृपा के पात्र बन जायेंगे।

इस कड़ी में अम्मा को ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न की यात्रा में देखिये, जहाँ अम्मा यह भजन गा रही हैं.. होली आई..

अमृत गंगा S2-43

अमृत गँगा,सीज़न २ की तैंतालीसवीं कड़ी में,अम्मा बताती हैं कि महाशिवरात्रि भारत के अनेक बड़े त्यौहारों में से एक है। यह रात्रि शिवजी के भजन-स्मरण हेतु समर्पित है। यह अन्य त्यौहारों से तनिक हट कर है। यह ज्ञान, वैराग्य-त्याग और तप का सन्देश देता है और हमें अपने स्वरुप में जागने की याद दिलाता है। लेकिन शिवरात्रि स्मरण-भजन के लिए एकमात्र दिन ही क्यों, आत्म-साक्षात्कार हेतु हमें आजीवन व्रत लेना चाहिए।

इस कड़ी में अम्मा की उत्तरी-अमेरिका की यात्रा, टोरंटो, कैनेडा पहुंची है। इस कड़ी में अम्मा ने जो भजन गाया है, वो है हरि ॐ नमः शिवाय।

अमृत गंगा S2-42

अमृत गँगा सीज़न २ की बयालीसवीं कड़ी में, अम्मा बताती हैं कि संसार में उलझे लोगों की आध्यात्मिकता में कोई रुचि नहीं होती। तभी तो शास्त्रों का बार-बार श्रवण करने के बाद भी कुछ लोग आत्मा और अनात्मा में, सनातन और क्षणभंगुर में विवेक नहीं कर पाते। उनमें न तो यह समझने की शक्ति होती है और न ही वे प्रयत्न करते हैं। इसीलिए आध्यात्मिक उत्थान की आवश्यकता है।

इस कड़ी में, आप उत्तरी-अमेरिकी यात्रा को अपने अंतिम पड़ाव, कैनेडा के टोरोंटो में देखेंगे। इसी कड़ी में अम्मा को निम्न भजन गाते सुनिए.. कृपा करो…

अमृत गंगा S2-41

अमृत गँगा सीज़न २ की इकतालीसवीं कड़ी में, अम्मा बता रही हैं कि हम अहंकार की आँखों से देखते हैं। अहंकार मनुष्य की सभी समस्याओं का मूल कारण है। यही ‘मैं’, ‘मेरा’ और ‘मुझे चाहिए’ के भावों का निर्माता है। यही कारण है हमारी इतनी सारी पूर्वधारणाओं का। अहंकार के अभाव में हम हृदय से देखते हैं।

इस कड़ी में अम्मा की उत्तरी अमेरिका की यात्रा वाशिंगटन, डी.सी पहुँची है। इसी कड़ी में,अम्मा भजन गा रही हैं, जय जय जय दुर्गा महारानी…