अमृत गंगा S3-01

अमृत गँगा सीज़न 3 में आपका स्वागत है!

इसकी पहली कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि अक्सर सत्ता लोगों के सर पर चढ़ कर बोलती है। वे मानो पगला से जाते हैं। लेकिन जब श्रीराम ने राज्य का भार भरत के कन्धों पर डाला तो भरत का मन ज़रा भी दूषित नहीं हुआ। चूँकि सत्ता भरत को छू तक नहीं पाई,इसीलिये वो बढ़िया राज्य कर पाए और प्रजा को शांतिपूर्ण जीवन दे पाए। अच्छा राजा वही है जो अपनी प्रजा की रक्षा कर सके।

‘हनुमत बल दो..’ – इस कड़ी में, अम्मा ने यह भजन गाया है!

अमृत गंगा S2-49

अमृत गंगा,सीज़न २ की उनचासवीं कड़ी में,अम्मा ने कहा कि टेंशन-रहित तो आज कोई नहीं है; थोड़ी-बहुत tension तो हमेशा रहेगी; वस्तुतः यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार ला सकती है और हमारी प्रतिभाओं व अंतरात्मा को जगा सकती है; हमें सुबह जल्दी उठने में सहायक हो सकती है। लेकिन अनावश्यक tension के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। शरीर सम्बन्धी समस्याएं हो सकती हैं जैसे; सिरदर्द, पेटदर्द, अनिद्रा और अवसाद। हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकर हो सकती है यह!

इस कड़ी में देखिये, अम्मा की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के अंतिम पड़ाव, गोल्ड कोस्ट को और सुनिए अम्मा का गाया पंजाबी भजन, मेरी चोंपड़ी दे..

अमृत गंगा S2-48

अमृत गँगा सीज़न २ की अड़तालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि भारत की सच्ची सम्पदा है, जगत के उद्धार हेतु, यहाँ हुए महात्माओं द्वारा बताया गया सनातन सत्य का मार्ग! रामायण देश-काल से अतीत है। यह ऐसा इतिहास है जो महात्माओं के जीवन-चित्रण द्वारा समाज में धर्म और मूल्यों की प्रेरणा देता है। श्रीराम का महिमामय जीवन-चरित्र विश्व भर में फैला और देश-काल की सीमाओं को लाँघ गया। बच्चों को धार्मिक मूल्य सिखाने का यह शक्तिशाली मंत्र है।

इस कड़ी में आप अम्मा की ऑस्ट्रेलियाई यात्रा के तीसरे पड़ाव, ब्रिस्बेन को देखेंगे और साथ ही अम्मा का गाया भजन सुनेंगे…वर दे, वर दे..

अमृत गंगा S2-47

अमृत गँगा,सीज़न २ की सैंतालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि जीवन एक नदी समान है। इसके तटवर्ती निवासी नदी का केवल एक भाग देख पाते हैं। पर इसका अर्थ यह नहीं कि नदी उतनी ही है, जितनी उन्हें दिखाई देती है। हम इसका न स्रोत देखते हैं, न ही गंतव्य! ऐसा ही है जीवन भी! इसका न आदि है न अंत..बस बहता जाता है।

इस कड़ी में, अम्मा की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दूसरे नगर सिडनी को दिखाया जा रहा है और साथ ही अम्मा द्वारा गाया भजन, ‘सिर में मयूर..’

अमृत गंगा S2-44

अमृत गँगा, सीज़न २ की चौवालीसवीं कड़ी में अम्मा कहती हैं कि लहरों में तैरना जानने वाला, आनन्द का भागी होता है जबकि तैराकी न जानने वाले डूब सकते हैं। शास्त्रों और सत्संग का श्रवण करने वाले लोगों के साथ भी कुछ ऐसा ही है। उनमें सब परिस्थितियों को समत्वपूर्वक स्वीकारने योग्य मनोबल होता है।

इस कड़ी में अम्मा की यात्रा मलेशिया के पेनांग में पहुंची है। इसी कड़ी में, अम्मा भजन गा रही हैं..आनन्द जननी..