अमृत गंगा S3-32

अमृत गंगा, सीज़न ३, की बत्तीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हममें विवेक और धैर्य होना चाहिए और क्रोध जैसी नकारात्मक भावनाओं के आवेश में आकर आवेगपूर्ण कर्मों से बचना चाहिए।

अमृत गंगा की इस कड़ी में, अम्मा की यात्रा फ़्रांस के पैरिस में जारी है। अम्मा ने भजन गाया है, ‘मुरली बजाते आना…’

अमृत गंगा S3-31

सीज़न ३, अमृत गंगा की इकत्तीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि धरती पर रहते हुए स्वर्ग का अनुभव संभव है – हमें इस मनोभाव को जागृत करने का प्रयत्न करना चाहिए।

अमृत गंगा की इस कड़ी में, अम्मा की यात्रा डेनमार्क में जारी है। अम्मा ने भजन गाया है,’पाहि गजानन…’

अमृत गंगा S3-30

सीज़न ३ की अमृत गंगा की तीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि जीवन की पुस्तिका में जो हम कल लिख चुके हैं उसे आज मिटा या बदल नहीं सकते। और न ही आने वाले कल का पन्ना खोल सकते हैं। इसके स्थान पर हम प्रयत्न करें कि आज के पन्ने पर सावधानी के साथ, सुन्दर और स्मरणीय वचन लिखें। ताकि हमारे जीवन का उपयोग विश्व एवं भावी पीढ़ियों को कुछ उपयोगी सहयोग देने में हो सके।

अमृत गंगा की इस कड़ी में अम्मा की यात्रा डेनमार्क में जारी है। अम्मा ने जो भजन गाया है, वो है ‘शंकरा शिवशंकरा’!

अमृत गंगा S3-29

अमृत गँगा,सीजन ३ की २९वीं कड़ी: अम्मा सबको नव-वर्ष की शुभ कामनाएँ दे रही हैं। वो कामना करती हैं कि हम सबके लिए नया वर्ष और अधिक सुख, समृद्धि और शांति से भरा हो! वो हमें पहले से भी अधिक श्रद्धा व विवेक सहित जीने की याद दिला रही हैं। इस शुभ अवसर पर वो हमें और प्रार्थनामय होने को प्रोत्साहित कर रही हैं क्योंकि पूर्णता तो तभी आती है जब ईश्वर की कृपा आ जुड़ती है! अमृत गँगा की इस कड़ी में अम्मा की यात्रा स्विटज़रलैंड में जारी रहेगी और अम्मा जो भजन गाएँगी वो है: लोका: समस्ता: सुखिनो भवन्तु!

अमृत गंगा S3-28

अमृत गंगा,सीज़न ३ की २८वीं कड़ी में अम्मा हमें याद दिला रही हैं कि जीवन चक्र में चल रहा है। दिन के बाद रात और रात के बाद फिर दिन होता है। महीनों और ऋतुओं का चक्र होता है। सुख-दुःख चक्र से आते-जाते रहते हैं। समय चक्र में चलता है ताकि हमें स्वयं को सुधारने के,अपनी भूलें सुधार कर सत्कर्म करने के अवसर मिलें।

अमृत गंगा की प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की यात्रा स्विट्ज़रलैंड पहुंची है। अम्मा ने जो भजन गाया,वो है, ‘छोड़ दे मन से…’