अमृत गंगा S3-41

सीज़न ३, अमृत गंगा की इकतालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि जैसे कागज़ पर शहद लिख कर चाटने से मिठास का अनुभव नहीं होता; वैसे ही वेदांत पर शास्त्रार्थ कर लेने का अर्थ यह नहीं कि तुमने इसके तत्त्व को जीवन में भी उतारा है।

अम्मा की यात्रा फ़्रांस के टूलॉन में जारी है। अम्मा ने भजन गाया है, भगवान कृष्ण आ कर..

अमृत गंगा S3-40

सीज़न ३, अमृत गंगा की चालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि चौबीसों घंटे काम करते रहने का नाम त्याग नहीं है। दूसरों की सेवा हेतु अपनी नींद का त्याग, ज्ञान पर आधारित त्याग कहलाता है।

अम्मा की यात्रा जर्मनी के हॉफ़ हैरनबर्ग में जारी है। अम्मा ने ‘अमृत कले’ भजन भी गाया है।

अमृत गंगा S3-39

​सीज़न 3, अमृत गँगा की उनतालीसवीं कड़ी में अम्मा कहती है मनुष्य-जीवन पाकर क्या हम विवेक सहित रहते हैं? विवेक जहाँ अपने आपे को खोलने की कुञ्जी है; वहीं जीव-जगत के प्रति करुणा को बढ़ाने का साधन भी है।

इस कड़ी में अम्मा की यात्रा जर्मनी के हॉफ हैरनबर्ग में ही जारी है। अम्मा ने, ‘आई है होली’ – भजन गाया है!

अमृत गंगा S3-37

सीज़न 3, अमृत गँगा की सैंतीसवीं कड़ी में अम्मा ने कहा कि शिव-तत्त्व का सार ही है, भगवान शिव के वास्तविक तत्त्व में जागना। अपने भीतर झांकना और अपने सच्चे स्वरुप को जान कर प्रत्येक वस्तु, व्यक्ति में आत्मा के उस एकत्व के दर्शन करना।

अम्मा की यात्रा जर्मनी के हॉफ़ हैरनबर्ग में है। अम्मा ने ‘राधिका मनोहरा’ (हरे राम हरे राम..) भजन गाया है।

अमृत गंगा S3-36

सीज़न 3, अमृत गँगा की छत्तीसवीं कड़ी में अम्मा कह रही हैं कि, “इस मनुष्य-जीवन का उद्देश्य है कि हम प्रेम में जन्में, प्रेम में जियें और फिर प्रेम में ही लीन हो जाएँ। अध्यात्म और भगवद्भक्ति ही इसकी प्राप्ति के उपाय हैं।”

अम्मा की यात्रा जर्मनी के स्टैनबर्ग में पहुंची है। अम्मा आज तेलुगु भजन गा रही हैं, ‘शिव शिव रूद्र शिवा!’