अमृत गंगा S4-77 सीज़न 4, अमृत गंगा की सतहत्तरवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “अमरत्व के लिए ‘मैं’ का भाव मिटाना होगा; वरना दान और यज्ञ भी मुक्ति नहीं दे सकते।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘यदुपति मनहारी।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – डालस कार्यक्रम।
अध्यतन वार्ता
- करुणा ज्ञान सहित होना चाहिए
- अपने लिए, अपने आप, अपने में जागो
- जगत में रहो, मन स्वयं में रखो
- गुरु के प्रति समर्पण यानि अपने स्वरुप को जानना
- तत्व अनुसार जिए , पद अनुसार नहीं
- ध्यान लक्ष्य पर हो, तो भटकेंगे नहीं
- प्रकृति से जुड़ाव तन-मन को स्वस्थ रखता है
- अनुशासन हमें सशक्त बनाता है
- सीख और संस्कार बचपन से शुरू होनी चाहिए
- भक्ति और विश्वास से अपना ही उत्थान होता है
When Love is there, distance dosen't matter.
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