अमृत गंगा 2 अमृत गंगा की दूसरी कड़ी में, अम्मा जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु आवश्यक पुरुषार्थ, समर्पण-भाव और कृपा पर सत्संग दे रही हैं। अम्मा कहती हैं कि खुश रहना एक निर्णय है और हमें ईश्वर की इच्छा के सामने समर्पण-भाव सहित और आत्मविश्वासपूर्वक आगे बढ़ना चाहिए। प्रेम उनका धर्म है और उस […]
अध्यतन वार्ता
- आध्यात्मिक ज्ञान हो तो मन कभी बंधेगा नहीं
- ईश्वर कृपा हमारे जीवन का आधार है
- ख़ुशी परिस्थिति नहीं, मानसिक स्थिति है
- आत्म कृपा एक आंतरिक उपलब्धि है
- सच्चे प्रेम में सौदा नहीं होता
- हर हाल में साधना की निरंतरता बनाए रखें
- दूसरों के प्रति विचारवान भाव रखें
- संतोष का स्रोत हृदय में है, वस्तुओं में नहीं
- उत्तम आदर्शों से जीवन को अर्थपूर्ण बनाए
- परिवर्तन संसार का स्वभाव है
When Love is there, distance dosen't matter.
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