अमृत गंगा S3-97 सीज़न 3, अमृत गंगा की सत्तानवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, ‘ईश्वर की प्राप्ति हेतु समर्पित साधक निरंतर आध्यात्मिक चिंतन, ध्यान, जप द्वारा इन कामनाओं से क्रमेण ऊपर उठ सकता है।’ अम्मा के कार्यक्रम ‘ऑस्ट्रेलिया’ के सनशाइन कोस्ट में। अम्मा भजन गाती हैं ‘गं गणपतये‘ ।
अध्यतन वार्ता
- आध्यात्मिक ज्ञान हो तो मन कभी बंधेगा नहीं
- ईश्वर कृपा हमारे जीवन का आधार है
- ख़ुशी परिस्थिति नहीं, मानसिक स्थिति है
- आत्म कृपा एक आंतरिक उपलब्धि है
- सच्चे प्रेम में सौदा नहीं होता
- हर हाल में साधना की निरंतरता बनाए रखें
- दूसरों के प्रति विचारवान भाव रखें
- संतोष का स्रोत हृदय में है, वस्तुओं में नहीं
- उत्तम आदर्शों से जीवन को अर्थपूर्ण बनाए
- परिवर्तन संसार का स्वभाव है
When Love is there, distance dosen't matter.
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