अमृत गंगा S3-98 सीज़न 3, अमृत गंगा की अट्ठानवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, ‘आज हम स्वार्थ-कर्मों के लिए ही जीवित हैं, न धर्म..न मोक्ष के लिए; मोक्ष को परम लक्ष्य मान कर हमें आगे बढ़ना चाहिए।’ अम्मा के कार्यक्रम सिंगापुर में। अम्मा भजन गाती हैं ‘अंबे जगदम्बे‘ ।
अध्यतन वार्ता
- सेवा का अवसर देने वाले के प्रति कृतज्ञ रहें
- ज्ञान की कसौटी अनुभव और आचरण है
- परोपकार में आनंद है
- विवेक-बुद्धि से सही दृष्टि
- आध्यात्मिक ज्ञान हो तो मन कभी बंधेगा नहीं
- ईश्वर कृपा हमारे जीवन का आधार है
- ख़ुशी परिस्थिति नहीं, मानसिक स्थिति है
- आत्म कृपा एक आंतरिक उपलब्धि है
- सच्चे प्रेम में सौदा नहीं होता
- हर हाल में साधना की निरंतरता बनाए रखें
When Love is there, distance dosen't matter.
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