अमृत गंगा S4-61 सीज़न 4, अमृत गंगा की इकसठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “जो विद्या व्यक्तित्व को निखारे, सोई प्रतिभाओं को जगाए और हमें स्वतंत्रता व परमात्मा की ओर ले जाए, वही सच्ची विद्या है।” अम्मा गुजराती भजन गाती हैं, ‘अमे माँ मैया।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – सान रमोन कार्यक्रम
अध्यतन वार्ता
- आध्यात्मिक ज्ञान हो तो मन कभी बंधेगा नहीं
- ईश्वर कृपा हमारे जीवन का आधार है
- ख़ुशी परिस्थिति नहीं, मानसिक स्थिति है
- आत्म कृपा एक आंतरिक उपलब्धि है
- सच्चे प्रेम में सौदा नहीं होता
- हर हाल में साधना की निरंतरता बनाए रखें
- दूसरों के प्रति विचारवान भाव रखें
- संतोष का स्रोत हृदय में है, वस्तुओं में नहीं
- उत्तम आदर्शों से जीवन को अर्थपूर्ण बनाए
- परिवर्तन संसार का स्वभाव है
When Love is there, distance dosen't matter.
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