अमृत गंगा S4-84सीज़न 4, अमृत गंगा की चौरासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “जहाँ कहीं करुणा का प्रस्फुटन दिखे,उसे ‘माँ’ कहने की परंपरा रही है। मातृत्व की महिमा को समझकर ही हमारी संस्कृति पुष्पित-पल्लवित हुई है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘हरी नारायण जय नारायण।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – वॉशिंगटन डी सी कार्यक्रम।
अध्यतन वार्ता
- ध्यान लक्ष्य पर हो, तो भटकेंगे नहीं
- प्रकृति से जुड़ाव तन-मन को स्वस्थ रखता है
- अनुशासन हमें सशक्त बनाता है
- सीख और संस्कार बचपन से शुरू होनी चाहिए
- भक्ति और विश्वास से अपना ही उत्थान होता है
- तत्व अनुसार जिए , पद अनुसार नहीं
- अहंकार शोर है, नम्रता मौन
- पात्रं विलोक्य ज्ञानं देयम्
- कृतज्ञ हृदय ही श्रेष्ठ ईश्वर समर्पण है
- सेवा का अवसर देने वाले के प्रति कृतज्ञ रहें
When Love is there, distance dosen't matter.
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