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अमृत गंगा S4-87 सीज़न 4, अमृत गंगा की सत्तासीवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “जीवन का प्रकाश आशा और प्रेम है। क्रोध और घृणा उसकी छाया हैं। प्रकाश को ही अपनाएँ।” अम्मा देवी भजन गाती हैं, ‘हे कृपामयी अंबे।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा न्यूयॉर्क की ओर चल पड़ी है।

अमृत गंगा S3-18 अमृत गँगा सीज़न ३ की अठारहवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हम किसी भी कार्य को बड़ा या छोटा न समझें बल्कि प्रत्येक कर्तव्य-कर्म को समान आदर दें। भगवान कृष्ण ने हमें दिखलाया कि हर कर्म आदरणीय है, गरिमामय है। उन्होंने जितने आनन्द से घोड़ों की सेवा की, उतने ही […]