Category / अमृतगंगा

अमृत गंगा Specials 2 अमृत गंगा की इस कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि अपने में परिवर्तन लाने के लिए, हमें राह नहीं देखनी कि पहले दूसरे बदलें। बल्कि, पहले हम बदलें और दूसरों के लिए प्रेरणा-स्रोत बनें। हमारा प्रत्येक सत्कर्म, प्रत्येक सुविचार कई गुणा फल देगा। जब हमारे हृदय में अरुणोदय होगा तो […]

अमृत गंगा Specials 1 अमृत गंगा की इस कड़ी में, अम्मा हमें याद दिला रही हैं कि हमारी साधना का लक्ष्य अपनी खोई हुई सरलता को पाना है। सरलता, सहजता द्वारा ही हममें आत्मज्ञान जागृत होगा। अम्मा कहती हैं कि अभी हमारी सरलता, निष्कलङ्कता को अहंकार के धुएँ ने ढक रखा है और इस अहंकार […]

अमृत गंगा S2-07 अमृत गँगा, सीज़न २ की सातवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि हमारे सपने और योजनाएं हमारे युवा अर्थात तरोताज़ा बनाये रखते हैं और हम में आत्मविश्वास पैदा करते हैं। आत्मविश्वास खो कर, हम मानो सब कुछ खो देंगे। हम सपने तो देखें लेकिन बस सपनों में ही न खोये रहें! कर्म […]

अमृत गंगा S2-06 अमृत गँगा सीज़न २ की छठी कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि कहीं चोट लगने पर, संभवतः हम दर्द से रो पड़ें। लेकिन रोने-चिल्लाने से घाव तो भरने वाला नहीं; दवा लगानी होगी। कई लोग बिलकुल प्रयत्न नहीं करते। उपयुक्त कर्म नहीं करते। किन्तु, हम समस्याओं का समाधान प्रयत्न द्वारा ही कर […]

अमृत गंगा S2-05 अमृत गँगा, सीज़न २ की पाँचवीं कड़ी में, अम्मा बता रही हैं कि जगत में रहते-रहते हम वासनाओं का निर्माण कर लेते हैं। लेकिन जब तक वासनाएं हैं, तब तक दुःख भी रहेंगे। जहाँ आग है, वहां धुआँ तो होगा! जब मन का झूला सुख की ओर जा रहा होता है, तब […]