अमृत गंगा S4-49

सीज़न 4, अमृत गंगा की उनतालीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “यदि वानर-मन ही मार्गदर्शक रहा, तो सांसारिक भोग हमें बहकाएँगे और हम गहरे संकट में पड़ जाएँगे।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘माय भवानी (मराठी)।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – कोषीकोड कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-48

सीज़न 4, अमृत गंगा की अड़तालीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “गुरु के सान्निध्य में अहंकार रूपी असुर को भगाकर ही हम अपने स्वरूप को जान पाएँगे।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘कैसा संदेशा।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – कोषीकोड कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-47

सीज़न 4, अमृत गंगा की सैंतालीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “गुरु-पूर्णिमा शिष्य को गुरु की पूर्णावस्था का स्मरण दिलाकर स्वयं उसे प्राप्त करने का संदेश देती है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘भवानी जय जय।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – कोषीकोड कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-45

सीज़न 4, अमृत गंगा की पैंतालीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “आध्यात्मिक समझ से प्राप्त धैर्य दुःख को हटाकर सुख और शांति लाता है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘जिस हाल में।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – पालक्काड कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-44

सीज़न 4, अमृत गंगा की चवालीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “जैसे कार शुरू करने के लिए चाबी चाहिए, वैसे जीवन में आगे बढ़ने के लिए विवेक। आध्यात्मिक हो या सांसारिक जीवन, पहली ज़रूरत है विवेक-बुद्धि।” अम्मा देवी भजन गाती हैं, ‘माँ नाम बोले।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – पालक्काड कार्यक्रम।