अमृत गंगा S3-11

अमृत गँगा सीज़न ३ की ११वीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि स्वस्थ मन आनंद का आधार है। संयमित मन तो संयमित वचन! हम यदि अपने मन में उठने वाले विचारों के प्रति सजग नहीं रहते तो विचार,विकार बन कर दुष्कर्मों के रूप में अभिव्यक्त होंगे।

इस कड़ी में, भारत यात्रा पुणे में जारी है। अम्मा मराठी भजन भी गा रही हैं: गाऊँ रे तुझे अभंग..

अमृत गंगा S3-10

अमृत गँगा सीज़न ३ की १० वीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हमें वचनों के उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए। बोलने से पहले सोच लेना चाहिए। कुछ गलत, बुरा होते देखें तो अवश्य बोलना चाहिए किन्तु सच जाने बिना, किसी को दोष देना या दंड देना अनुचित होगा।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा पुणे में जारी है। अम्मा भजन भी गा रही हैं, सीताराम, सीताराम…

अमृत गंगा S3-09

अमृत गँगा, सीज़न ३ की नवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि कृपा का पात्र बनने के लिए हम अच्छे वचन बोलें और अच्छे कर्म करें। वचन किसी साँचे जैसे होते हैं। सांचे में दोष होगा तो उसमें जो भी डालेंगे, विकृत हो जायेगा। इसलिए वचनों में सावधानी बरतें; बोलने से पहले सोच लो!

इस कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा हैदराबाद में जारी है।अम्मा भजन भी गा रही हैं, हरे मुरारे..

अमृत गंगा S3-08

अमृत गँगा,सीज़न ३ की आठवीं कड़ी में,अम्मा कह रही हैं कि जीवन में समस्याओं का आना अवश्यम्भावी है। उनके समाप्त होने की राह देखना,समुद्र की लहरों की समाप्ति राह देखने जैसा है! हम में साहस और धैर्य होना चाहिए। आध्यात्मिकता हमें आवश्यक मानसिक शक्ति देती है।

इस कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा को आप हैदराबाद में देखेंगे और साथ ही उनका गाया भजन सुनेंगे, ‘जय माँ अम्बे!’

अमृत गंगा S3-07

अमृत गँगा,सीज़न ३ की ७वीं कड़ी में, अम्मा बता रही हैं कि चाहे हम प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने का कितना भी प्रयत्न क्यों न करें, विफलता अपरिहार्य है। उत्कृष्ट खिलाड़ी भी हर बार नहीं जीतता। जैसे हम सफ़लता को स्वीकार करते हैं, वैसे ही विफलता को भी स्वीकार करना सीखना चाहिए। जीवन में पूर्णता तभी आती है,जब हम समत्व के साथ जीवन के उतार-चढ़ाव को स्वीकार करते हैं!

इस कड़ी में अम्मा की भारत यात्रा में आप देखेंगे बेंगलुरु कार्यक्रम! साथ ही रसास्वादन कीजिये, ‘आंसू भरे नयनों से’।