अमृत गंगा S3-23

अमृत गँगा, 23वीं कड़ी, सीज़न 3, अम्मा ने कहा कि आज विश्व दो प्रकार की गरीबी से ग्रसित है। एक गरीबी प्रेम की और दूसरी भोजन, जल और आवास जैसी मूल आवश्यकताओं की। पहली प्रकार की गरीबी को मिटा सकें तो हम दूसरी प्रकार गरीबी से भी मुक्त हो सकते हैं। जहाँ प्रेम है, वहां करुणा भी होगी। आध्यात्मिकता करुणा से आरम्भ होती है और करुणा पर ही समाप्त!

अमृत गँगा की इस कड़ी में, आप देखेंगे अम्मा की आयरलैंड यात्रा! अम्मा पंजाबी गा रही हैं – खोल दरवाजा…

अमृत गंगा S3-22

अमृत गंगा, सीज़न 3, कड़ी 22: अम्मा हमें याद दिला रही हैं कि हम अलग-थलग द्वीप नहीं बल्कि एक ही शृंखला की कड़ियाँ हैं। एक अकेले व्यक्ति के लिए परिवर्तन लाना शायद संभव न हो लेकिन कई लोग मिल कर करें तो दूसरों की भलाई के लिए कुछ अच्छा अवश्य कर सकते हैं। अनेक यदि एक हो कर आगे आएं तो कठिन से कठिन उपलब्धि सरल हो जाये!

अमृत गंगा की इस कड़ी में अम्मा की यात्रा स्पेन के बार्सलोना में जारी रहेगी। जय मुरलीधर माधवा..अम्मा यह भजन भी गाएंगी।

अमृत गंगा S3-18

अमृत गँगा सीज़न ३ की अठारहवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हम किसी भी कार्य को बड़ा या छोटा न समझें बल्कि प्रत्येक कर्तव्य-कर्म को समान आदर दें। भगवान कृष्ण ने हमें दिखलाया कि हर कर्म आदरणीय है, गरिमामय है। उन्होंने जितने आनन्द से घोड़ों की सेवा की, उतने ही आनंदपूर्वक अर्जुन को उपदेश दिया। इसी प्रकार, हमें भी अपने पद-प्रतिष्ठा का अति अभिमान नहीं करना चाहिए। कोई कर्म तुच्छ नहीं, सब कर्म महान हैं।

इस कड़ी में भी, अम्मा को आप दिल्ली यात्रा में पाएंगे। ‘जय जय दुर्गे मात भवानी’- अम्मा यह भजन गा रही हैं।

अमृत गंगा S3-19

अमृत गँगा, सीज़न ३ की उन्नीसवीं कड़ी में अम्मा कहती हैं कि अक्सर लोगों को अपने नाम, पद-प्रतिष्ठा और जाति का अभिमान होता है लेकिन श्रीकृष्ण ने कभी किसी को नाम और पद के अनुसार बड़ा-छोटा नहीं माना। इन संकीर्णताओं से ऊपर उठ कर मानसिक विशालता और संतृप्ति मिलती है।

इस कड़ी में, आप अम्मा के चंडीगढ़ में प्रथम आगमन को देखेंगे और सुनेंगे अम्मा का गाया भजन – कहाँ हो कान्हा…

अमृत गंगा S3-20

अमृत गंगा, सीज़न ३, बीसवीं कड़ी; अम्मा ने प्रकाशोत्सव दिवाली पर कहा कि यह पावन दिवस हमें बुराई के अंधकार से भलाई के प्रकाश की ओर चलने व अपने भीतर के ईश्वर-तत्व को जागृत करने की याद दिलाता है। इस अवसर पर हम अपने घर व ह्रदय में सुख-समृद्धि की देवी, महालक्ष्मी का आह्वान करते हैं। हम सब प्रार्थना करें, ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’, हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो!

यह अमृत गंगा का १०१ वां भाग है। इसमें फ़्रांस, और अमृतपुरी आश्रम में अम्मा की उपस्थिति में दिवाली का उत्सव दिखाया जा रहा है। अम्मा ने भजन गाया, ‘जय जय राम सीता राम’