अमृत गंगा S4-53

सीज़न 4, अमृत गंगा की तिरपनवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “एक ज्ञानी, अस्तित्व के एकत्व को समझते हुए, प्रवाह के साथ बहकर जीवन की हर परिस्थिति को पूर्णतः स्वीकार कर लेता है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘भवमोचक भयभंजक।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – कोच्ची कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-52

सीज़न 4, अमृत गंगा की बावनवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “पिछले जन्मों के कर्मों के फलस्वरूप हर किसी के जीवन में कठिन समय आता ही है। ऐसे में अपना आत्मविश्वास टूटने न दें, बल्कि अपने आत्मतत्व को और दृढ़ता से पकड़े रहें।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘गोपाल नाचो नाचो।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – कोच्ची कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-51

सीज़न 4, अमृत गंगा की इक्यावनवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “गुरु से संबंध यानि अपने स्वरुप से ऐक्य, इसीलिए आध्यात्मिक मार्ग निज-स्वरुप की ओर यात्रा है, जो परम मुक्ति का राजमार्ग है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘प्यारे कान्हा।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – कोच्ची कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-50

सीज़न 4, अमृत गंगा की पचासवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “साधारण अध्यापक विद्यार्थी को केवल शिक्षा देता है, कष्ट नहीं, पर गुरु उसे कष्टकर परिस्थितियों में डालकर देह-मन की सीमाओं से ऊपर उठाता है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘सूनी है गलियां।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा चल पड़ी है कोच्ची की ओर।

अमृत गंगा S4-49

सीज़न 4, अमृत गंगा की उनतालीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “यदि वानर-मन ही मार्गदर्शक रहा, तो सांसारिक भोग हमें बहकाएँगे और हम गहरे संकट में पड़ जाएँगे।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘माय भवानी (मराठी)।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – कोषीकोड कार्यक्रम।