अमृत गंगा S4-53 सीज़न 4, अमृत गंगा की तिरपनवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “एक ज्ञानी, अस्तित्व के एकत्व को समझते हुए, प्रवाह के साथ बहकर जीवन की हर परिस्थिति को पूर्णतः स्वीकार कर लेता है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘भवमोचक भयभंजक।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – कोच्ची कार्यक्रम।
अध्यतन वार्ता
- आध्यात्मिक ज्ञान हो तो मन कभी बंधेगा नहीं
- ईश्वर कृपा हमारे जीवन का आधार है
- ख़ुशी परिस्थिति नहीं, मानसिक स्थिति है
- आत्म कृपा एक आंतरिक उपलब्धि है
- सच्चे प्रेम में सौदा नहीं होता
- हर हाल में साधना की निरंतरता बनाए रखें
- दूसरों के प्रति विचारवान भाव रखें
- संतोष का स्रोत हृदय में है, वस्तुओं में नहीं
- उत्तम आदर्शों से जीवन को अर्थपूर्ण बनाए
- परिवर्तन संसार का स्वभाव है
When Love is there, distance dosen't matter.
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