यज्ञ का सिद्धांत है कि कोई कहीं भी, किसी भी युग में रहे, सभी लोगों को प्रकृति के नियमानुसार परस्पर प्रेम तथा एकतासहित रहना चाहिए। हम प्रकृति से जितना लेते हैं उसके बदले में उसे कुछ लौटाने की कर्तव्य-भावना से इस पंचमहायज्ञ के चलन का श्रीगणेश हुआ। गृहस्थाश्रमियों के लिए जिन पंचमहायज्ञों का विधान है, […]
अध्यतन वार्ता
- ध्यान लक्ष्य पर हो, तो भटकेंगे नहीं
- प्रकृति से जुड़ाव तन-मन को स्वस्थ रखता है
- अनुशासन हमें सशक्त बनाता है
- सीख और संस्कार बचपन से शुरू होनी चाहिए
- भक्ति और विश्वास से अपना ही उत्थान होता है
- तत्व अनुसार जिए , पद अनुसार नहीं
- अहंकार शोर है, नम्रता मौन
- पात्रं विलोक्य ज्ञानं देयम्
- कृतज्ञ हृदय ही श्रेष्ठ ईश्वर समर्पण है
- सेवा का अवसर देने वाले के प्रति कृतज्ञ रहें
When Love is there, distance dosen't matter.
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