अमृत गंगा S2-06 अमृत गँगा सीज़न २ की छठी कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि कहीं चोट लगने पर, संभवतः हम दर्द से रो पड़ें। लेकिन रोने-चिल्लाने से घाव तो भरने वाला नहीं; दवा लगानी होगी। कई लोग बिलकुल प्रयत्न नहीं करते। उपयुक्त कर्म नहीं करते। किन्तु, हम समस्याओं का समाधान प्रयत्न द्वारा ही कर […]
अध्यतन वार्ता
- संतोष का स्रोत हृदय में है, वस्तुओं में नहीं
- उत्तम आदर्शों से जीवन को अर्थपूर्ण बनाए
- परिवर्तन संसार का स्वभाव है
- जागरुकता ही आध्यात्मिकता का सार है
- मित और हित भाषी बने
- कृपा ईश्वर का स्वरूप
- एक धैर्यवान श्रोता बने
- निःस्वार्थ कर्म तमोगुण को घटाते हैं
- जीवन के अनिश्चिता का आनंद लेने का प्रयास करें
- समानता का आधार मानसिक शक्ति हो
When Love is there, distance dosen't matter.
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