अमृत गंगा S4-29 सीज़न 4, अमृत गंगा की उनतीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “जब शिष्य गुरु-वचन मानता है, तो गुरु-कृपा से पूर्णत्व प्राप्त होता है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘काज करो नित।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा चल पड़ी है पुणे की ओर।
अध्यतन वार्ता
- सेवा का अवसर देने वाले के प्रति कृतज्ञ रहें
- ज्ञान की कसौटी अनुभव और आचरण है
- परोपकार में आनंद है
- विवेक-बुद्धि से सही दृष्टि
- आध्यात्मिक ज्ञान हो तो मन कभी बंधेगा नहीं
- ईश्वर कृपा हमारे जीवन का आधार है
- ख़ुशी परिस्थिति नहीं, मानसिक स्थिति है
- आत्म कृपा एक आंतरिक उपलब्धि है
- सच्चे प्रेम में सौदा नहीं होता
- हर हाल में साधना की निरंतरता बनाए रखें
When Love is there, distance dosen't matter.
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