Category / अमृतगंगा

अमृत गंगा S2-46 अमृत गँगा,सीज़न २, की छियालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि प्रायः,हम ईश्वर को केवल दुःख के समय पुकारते हैं; इसीलिये दुःख हमें ईश्वर के समीपतर ले जाता है! ऐसा तभी संभव है यदि दुःख-मुसीबत में हमारा बोध बना रहे! यदि हमारे ह्रदय में बाल-सुलभ निष्कलङ्कता लिए प्रार्थना करेंगे तो निश्चय […]

अमृत गंगा S2-43 अमृत गँगा,सीज़न २ की तैंतालीसवीं कड़ी में,अम्मा बताती हैं कि महाशिवरात्रि भारत के अनेक बड़े त्यौहारों में से एक है। यह रात्रि शिवजी के भजन-स्मरण हेतु समर्पित है। यह अन्य त्यौहारों से तनिक हट कर है। यह ज्ञान, वैराग्य-त्याग और तप का सन्देश देता है और हमें अपने स्वरुप में जागने की […]

अमृत गंगा S2-42 अमृत गँगा सीज़न २ की बयालीसवीं कड़ी में, अम्मा बताती हैं कि संसार में उलझे लोगों की आध्यात्मिकता में कोई रुचि नहीं होती। तभी तो शास्त्रों का बार-बार श्रवण करने के बाद भी कुछ लोग आत्मा और अनात्मा में, सनातन और क्षणभंगुर में विवेक नहीं कर पाते। उनमें न तो यह समझने […]

अमृत गंगा S2-41 अमृत गँगा सीज़न २ की इकतालीसवीं कड़ी में, अम्मा बता रही हैं कि हम अहंकार की आँखों से देखते हैं। अहंकार मनुष्य की सभी समस्याओं का मूल कारण है। यही ‘मैं’, ‘मेरा’ और ‘मुझे चाहिए’ के भावों का निर्माता है। यही कारण है हमारी इतनी सारी पूर्वधारणाओं का। अहंकार के अभाव में […]

अमृत गंगा S2-40 अमृत गँगा, सीज़न २ की चालीसवीं कड़ी अम्मा कह रही हैं कि अहंकार पाइप में पानी को रोकने वाले मलबे जैसा है। यही मनुष्य की समस्याओं का मूल कारण है। ‘मैं’ के भाव से ही ‘मेरा’ और ‘मुझे चाहिए’ के भाव जन्म लेते हैं और मन को बेसुरा बनाते हैं। इस ‘अहम्’ […]