अमृत गंगा S3-19 अमृत गँगा, सीज़न ३ की उन्नीसवीं कड़ी में अम्मा कहती हैं कि अक्सर लोगों को अपने नाम, पद-प्रतिष्ठा और जाति का अभिमान होता है लेकिन श्रीकृष्ण ने कभी किसी को नाम और पद के अनुसार बड़ा-छोटा नहीं माना। इन संकीर्णताओं से ऊपर उठ कर मानसिक विशालता और संतृप्ति मिलती है। इस कड़ी […]
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अमृत गंगा S3-20 अमृत गंगा, सीज़न ३, बीसवीं कड़ी; अम्मा ने प्रकाशोत्सव दिवाली पर कहा कि यह पावन दिवस हमें बुराई के अंधकार से भलाई के प्रकाश की ओर चलने व अपने भीतर के ईश्वर-तत्व को जागृत करने की याद दिलाता है। इस अवसर पर हम अपने घर व ह्रदय में सुख-समृद्धि की देवी, महालक्ष्मी […]
अमृत गंगा S3-17 अमृत गँगा,सीज़न ३ की सत्रहवीं कड़ी में,अम्मा बता रही हैं कि श्रीकृष्ण जैसे अवतारों के माध्यम से हमें ईश्वरानुभूति हो सकती है। उनकी शिक्षाएं और कर्म वेदांत का प्रत्यक्ष प्रमाण होते हैं। वे देश-कालानुसार उपयुक्त धर्म को प्रदर्शित करके, जगत का उत्थान करने आते हैं। अवतार का मुख्य लक्ष्य मानव-हृदय में भगवद्भक्ति […]
अमृत गंगा S3-16 अमृत गंगा सीज़न ३ की सोलहवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि दुनियां में दो तरह की गरीबी है। एक है प्रेम की गरीबी, दूसरी भोजन और धन की गरीबी। प्रेम की गरीबी भोजन और धन की गरीबी से कहीं बड़ी है। दुःख का प्रतिकारक है प्रेम! प्रेम हो तो दूसरी […]
अमृत गंगा S3-15 अमृत गँगा, सीज़न ३ की १५वीं कड़ी में, अम्मा बता रही हैं कि बस वर्तमान क्षण हमारा है। अगली साँस तक हमारे हाथ में नहीं है। वर्तमान क्षण में किया विवेक, शेष जीवन का निर्णय करता है।इसलिए, विवेक सहित जीना सीखना चाहिए। इस कड़ी में, अम्मा की यात्रा अमदावाद में जारी है। […]

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