अमृत गंगा S3-45 सीज़न ३, अमृत गँगा की पैंतालीसवीं कड़ी में अम्मा कह रही हैं कि शास्त्र हमारे ऋषि-मुनियों के अभिलेख हैं। हमें इनके शब्दों को अच्छे से पचा कर, अपने में आत्मसात कर लेना है। इस कड़ी में, अम्मा की यूरोप यात्रा मिलान में जारी है। अम्मा ने भजन गाया है, ‘माँ जगदम्बे'(मुझे प्रेम […]
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अमृत गंगा S3-44 सीजन ३, अमृत गँगा की चौवालीस वीं कड़ी में अम्मा कह रही हैं कि हमारा प्रत्येक सत्कर्म हमें ईश्वर की ओर बढ़ाता है। अपने मार्ग के प्रकाश या अंधकार हम स्वयं हैं। अम्मा की यात्रा टूलॉन से इटली के मिलान की ओर चल पड़ी है! अम्मा ने भजन गाया है – गणेश […]
अमृत गंगा S3-43 सीज़न ३, अमृत गँगा की तैंतालीस वें कड़ी में अम्मा कह रही हैं कि यदि हम अपना मन परमात्मा को समर्पित करके, आध्यात्मिक तत्व को समझते हुए आगे बढ़ें तो, प्रत्येक वस्तु को साक्षी भाव से देख पाएँगे। अम्मा की यात्रा फ़्रान्स के टूलॉन में जारी है। अम्मा ने आज मराठी भाषा […]
अमृत गंगा S3-42 सीज़न ३, अमृत गंगा की बयालीसवीं कड़ी में अम्मा बता रही हैं कि समर्पण भाव आत्म-साक्षात्कार का कारण बनता है और न केवल मृत्यु के पार बल्कि ‘मैं’ और ‘मेरा’ के भाव के परे ले जाता है! अम्मा की यात्रा फ़्रांस के टूलॉन में जारी है। अम्मा एक बंगाली भजन गा रही […]
अमृत गंगा S3-41 सीज़न ३, अमृत गंगा की इकतालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि जैसे कागज़ पर शहद लिख कर चाटने से मिठास का अनुभव नहीं होता; वैसे ही वेदांत पर शास्त्रार्थ कर लेने का अर्थ यह नहीं कि तुमने इसके तत्त्व को जीवन में भी उतारा है। अम्मा की यात्रा फ़्रांस के […]

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