अमृत गंगा S4-62 सीज़न 4, अमृत गंगा की बासठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “ईश्वर की कृपा सदा उपलब्ध है, जैसे सूर्य निरंतर प्रकाश देता रहता है। उसे पाने के लिए हमें आत्मकृपा के रूप में अपनी खिड़कियाँ खोलनी होंगी।” अम्मा कृष्ण भजन गाती हैं, ‘आओ मेरे नन्दलाल।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – सान […]
Category / अमृतगंगा
अमृत गंगा S4-61 सीज़न 4, अमृत गंगा की इकसठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “जो विद्या व्यक्तित्व को निखारे, सोई प्रतिभाओं को जगाए और हमें स्वतंत्रता व परमात्मा की ओर ले जाए, वही सच्ची विद्या है।” अम्मा गुजराती भजन गाती हैं, ‘अमे माँ मैया।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – सान रमोन कार्यक्रम
अमृत गंगा S4-60 सीज़न 4, अमृत गंगा की साठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “मन स्वार्थी और करुणा-रहित है; उसे वश न किया तो जीवन सिर्फ जीभ और पेट तक सिमट जाएगा। मन की शुद्धि और वासनाओं से मुक्ति के लिए पहले महाकाली की कृपा आवश्यक है।” अम्मा श्री देवी भजन गाती हैं, ‘जय माँ […]
अमृत गंगा S4-59 सीज़न 4, अमृत गंगा की उनसठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “संकल्प लें – प्रेम न भी कर सकूँ, तो घृणा नहीं करूँगा — सबको जैसे हैं वैसे ही स्वीकार करूँगा।” अम्मा श्री कृष्ण भजन गाती हैं, ‘वन्दे नन्दकुमारम।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – सीएटल कार्यक्रम
अमृत गंगा S4-58 सीज़न 4, अमृत गंगा की अठावनवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “पुरुष और स्त्री के गुण अलग होते हैं। पर अधिकांश स्त्रियाँ एक ही समय में अनेक दिशाओं में बहने वाली नदी की तरह, पुरुषों से एक कदम आगे रहती हैं।” अम्मा भजन गाती हैं, मराठी भजन ‘आलो मी माते।’ इस प्रसंग […]

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