Category / अमृतगंगा

अमृत गंगा S2-39 अमृत गँगा सीज़न २ की उनतालीसवीं कड़ी में, अम्मा गुरु-शिष्य सम्बन्ध को अलौकिक व उत्कृष्ट बता रही हैं। वो कहती हैं कि यह सबसे उदात्त सम्बन्ध है, जिसमें रंचमात्र भी स्वार्थ नहीं है..माँ-बच्चे सम्बन्ध से भी कहीं बढ़ कर! एक ओर है कृपा और वात्सल्य तो दूसरी ओर पूर्ण समर्पण और दास्य-भाव […]

अमृत गंगा S2-38 अमृत गँगा सीज़न २ की अड़तीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि अगर हममें अच्छा शिष्य बनने की उत्कण्ठा है तो हमें अपने गुरु को अपना घनिष्ठ मित्र समझना चाहिए। एक अच्छे, सच्चे मित्र की बात मानना हमारे लिए आसान होता है। उसकी बात हम खुले ह्रदय और पूरी एकाग्रता के […]

अमृत गंगा S2-37 अमृत गँगा सीज़न २ की सैंतीसवीं कड़ी में, अम्मा अच्छे स्वास्थ्य और धन-सम्पत्ति दोनों का महत्त्व बता रही हैं। हमारे पास धन-दौलत हो भी तो अच्छे स्वास्थ्य के अभाव में हम उसका आनन्द नहीं उठा सकेंगे। धन और स्वास्थ्य दोनों हों, तब भी जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वस्थ […]

अमृत गंगा S2-36 अमृत गँगा, सीज़न २ की छत्तीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हम नए वर्ष के आरम्भ होते संकल्प तो अक्सर लेते हैं लेकिन अपनी पुरानी आदतों और वासनाओं के कारण उन्हें पूरा नहीं कर पाते। हम उन आदतों को छोड़ने को तैयार नहीं किन्तु जब तक उन्हें छोड़ते नहीं, परिवर्तन […]

अमृत गंगा S2-35 अमृत गँगा सीज़न २ की पैंतीसवीं कड़ी में,अम्मा कह रही हैं कि जैसे सब जगह कैमरे लगे हैं,वैसे ही हमारे भीतर भी एक कैमरा है..हमारी अंतरात्मा का कैमरा! यह हमारे सब कर्मों को रिकॉर्ड करता है। ईश्वर हमारे अंदर है पर हम राग-द्वेष व काम- क्रोध के वशीभूत हो,उसे अनुभूत नहीं कर […]