Category / अमृतगंगा

अमृत गंगा S2-48 अमृत गँगा सीज़न २ की अड़तालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि भारत की सच्ची सम्पदा है, जगत के उद्धार हेतु, यहाँ हुए महात्माओं द्वारा बताया गया सनातन सत्य का मार्ग! रामायण देश-काल से अतीत है। यह ऐसा इतिहास है जो महात्माओं के जीवन-चित्रण द्वारा समाज में धर्म और मूल्यों की […]

अमृत गंगा S2-47 अमृत गँगा,सीज़न २ की सैंतालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि जीवन एक नदी समान है। इसके तटवर्ती निवासी नदी का केवल एक भाग देख पाते हैं। पर इसका अर्थ यह नहीं कि नदी उतनी ही है, जितनी उन्हें दिखाई देती है। हम इसका न स्रोत देखते हैं, न ही गंतव्य! […]

अमृत गंगा S2-44 अमृत गँगा, सीज़न २ की चौवालीसवीं कड़ी में अम्मा कहती हैं कि लहरों में तैरना जानने वाला, आनन्द का भागी होता है जबकि तैराकी न जानने वाले डूब सकते हैं। शास्त्रों और सत्संग का श्रवण करने वाले लोगों के साथ भी कुछ ऐसा ही है। उनमें सब परिस्थितियों को समत्वपूर्वक स्वीकारने योग्य […]

अमृत गंगा S2-45 अमृत गँगा की पैंतालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि परमात्मा शुभ-मंगल की निधि हैं। जहाँ-जहाँ परमात्म-विचार होगा, वहां-वहां समृद्धि और गुण होंगे ही। प्रत्येक व्यक्ति में प्रबल विवेक और ईश्वरार्पण-बुद्धि नहीं होती। जहाँ कुछ चर-अचर प्राणी ज्ञान की घोर निद्रा में डूबे रहते हैं, वहीं ईश्वर-स्मरण में मस्त व्यक्ति के […]

अमृत गंगा S2-46 अमृत गँगा,सीज़न २, की छियालीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि प्रायः,हम ईश्वर को केवल दुःख के समय पुकारते हैं; इसीलिये दुःख हमें ईश्वर के समीपतर ले जाता है! ऐसा तभी संभव है यदि दुःख-मुसीबत में हमारा बोध बना रहे! यदि हमारे ह्रदय में बाल-सुलभ निष्कलङ्कता लिए प्रार्थना करेंगे तो निश्चय […]