Category / अमृतगंगा

अमृत गंगा S3-10 अमृत गँगा सीज़न ३ की १० वीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हमें वचनों के उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए। बोलने से पहले सोच लेना चाहिए। कुछ गलत, बुरा होते देखें तो अवश्य बोलना चाहिए किन्तु सच जाने बिना, किसी को दोष देना या दंड देना अनुचित होगा। इस कड़ी […]

अमृत गंगा S3-09 अमृत गँगा, सीज़न ३ की नवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि कृपा का पात्र बनने के लिए हम अच्छे वचन बोलें और अच्छे कर्म करें। वचन किसी साँचे जैसे होते हैं। सांचे में दोष होगा तो उसमें जो भी डालेंगे, विकृत हो जायेगा। इसलिए वचनों में सावधानी बरतें; बोलने से […]

अमृत गंगा S3-08 अमृत गँगा,सीज़न ३ की आठवीं कड़ी में,अम्मा कह रही हैं कि जीवन में समस्याओं का आना अवश्यम्भावी है। उनके समाप्त होने की राह देखना,समुद्र की लहरों की समाप्ति राह देखने जैसा है! हम में साहस और धैर्य होना चाहिए। आध्यात्मिकता हमें आवश्यक मानसिक शक्ति देती है। इस कड़ी में, अम्मा की भारत […]

अमृत गंगा S3-07 अमृत गँगा,सीज़न ३ की ७वीं कड़ी में, अम्मा बता रही हैं कि चाहे हम प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने का कितना भी प्रयत्न क्यों न करें, विफलता अपरिहार्य है। उत्कृष्ट खिलाड़ी भी हर बार नहीं जीतता। जैसे हम सफ़लता को स्वीकार करते हैं, वैसे ही विफलता को भी स्वीकार करना सीखना चाहिए। जीवन […]

अमृत गंगा S3-06 अमृत गँगा,सीज़न ३ की छठी कड़ी में,अम्मा कह रही हैं कि हमें उन वस्तुओं को प्राथमिकता देनी चाहिए जो हमारे जीवन में शान्ति,सुख और संतृप्ति ले कर आती हैं। हमें अपनी साधना और भजन के लिए थोड़ा समय निकालना ही चाहिए। साथ ही,अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह भी करना चाहिए और यह सोचें […]