Category / अमृतगंगा

अमृत गंगा S3-35 सीज़न 3, अमृत गँगा की पैंतीसवीं कड़ी में अम्मा कह रही हैं कि सुख हमें अपने भीतर खोजना चाहिए, बाह्य जगत में नहीं। भीतर खोजें तो हम उतना ही लेंगे जितना आवश्यक है, और सुख-संतृप्ति के बाद शेष दूसरों के साथ बांटना सीखेंगे। अम्मा की यात्रा अभी म्यूनिख़ में ही है। नंद […]

अमृत गंगा S3-34 अमृत गँगा,सीज़न ३ की चौंतीसवीं कड़ी में अम्मा कहती हैं कि मनुष्य को या तो अतीत की स्मृतियों में रहना अच्छा लगता है या भविष्य के सुहाने सपनों में! हमारी सब समस्याओं का प्रमुख कारण ही यह है कि हम अपने मूल आधार को भुला बैठे हैं! अम्मा का कारवाँ जर्मनी के […]

अमृत गंगा S3-33 सीज़न ३, अमृत गँगा की तैंतीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि यदि हमारा दिल आशा का दामन न छोड़े और चित्त सदा प्रसन्न रहे तो हमें सर्वत्र, सर्वदा नयेपन और सुख के दर्शन होंगे। अमृत गँगा की इस कड़ी में अम्मा की यात्रा फ़्रांस के पैरिस में जारी है। ‘बड़ी […]

अमृत गंगा S3-32 अमृत गंगा, सीज़न ३, की बत्तीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हममें विवेक और धैर्य होना चाहिए और क्रोध जैसी नकारात्मक भावनाओं के आवेश में आकर आवेगपूर्ण कर्मों से बचना चाहिए। अमृत गंगा की इस कड़ी में, अम्मा की यात्रा फ़्रांस के पैरिस में जारी है। अम्मा ने भजन गाया […]

अमृत गंगा S3-31 सीज़न ३, अमृत गंगा की इकत्तीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि धरती पर रहते हुए स्वर्ग का अनुभव संभव है – हमें इस मनोभाव को जागृत करने का प्रयत्न करना चाहिए। अमृत गंगा की इस कड़ी में, अम्मा की यात्रा डेनमार्क में जारी है। अम्मा ने भजन गाया है,’पाहि गजानन…’