Category / अमृतगंगा

अमृत गंगा S3-04 अमृत गँगा, सीज़न ३ की ५वीं कड़ी में, अम्मा उस राजा की कहानी सुना रही हैं जिसका मंत्री और कवि, दोनों अधार्मिक और धोखेबाज़ थे, फिर भी उसके मन को श्रीराम से अपनी तुलना भाती थी। जब ऐसे लोगों की संगति हो तो उसका राज्य रामराज्य-तुल्य कैसे कहा जा सकता था? आदर्श […]

अमृत गंगा S3-03 अमृत गँगा, सीज़न ३ की चौथी कड़ी में अम्मा बता रही हैं कि श्रीराम जैसे अवतार को भी सामान्य मनुष्य के स्तर पर उतरना पड़ता है ताकि हम उनसे प्रेरणा पा सकें। ईश्वर हमने यह दिखाने के लिए मनुष्य-देह धारण करता है कि कैसे मनुष्यत्व से ईश्वरत्व की ओर जाएँ! मानव देह […]

अमृत गंगा S3-02 अमृत गँगा सीज़न ३ की दूसरी कड़ी में आपका स्वागत है! इस कड़ी में अम्मा बता रही हैं कि जब जीवन में विघ्न-बाधाएं आएं तो, हमें श्रीराम की तरह साहस सहित उनका सामना करना चाहिए। हमें निरुत्साहित हो कर भाग नहीं खड़े होना चाहिए। श्रीराम का पथ काँटों-कंकड़ों से भरा था किन्तु […]

अमृत गंगा S3-01 अमृत गँगा सीज़न 3 में आपका स्वागत है! इसकी पहली कड़ी में, अम्मा कहती हैं कि अक्सर सत्ता लोगों के सर पर चढ़ कर बोलती है। वे मानो पगला से जाते हैं। लेकिन जब श्रीराम ने राज्य का भार भरत के कन्धों पर डाला तो भरत का मन ज़रा भी दूषित नहीं […]

अमृत गंगा S2-49 अमृत गंगा,सीज़न २ की उनचासवीं कड़ी में,अम्मा ने कहा कि टेंशन-रहित तो आज कोई नहीं है; थोड़ी-बहुत tension तो हमेशा रहेगी; वस्तुतः यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य में सुधार ला सकती है और हमारी प्रतिभाओं व अंतरात्मा को जगा सकती है; हमें सुबह जल्दी उठने में सहायक हो सकती है। लेकिन अनावश्यक tension […]