अमृत गंगा S4-60

सीज़न 4, अमृत गंगा की साठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “मन स्वार्थी और करुणा-रहित है; उसे वश न किया तो जीवन सिर्फ जीभ और पेट तक सिमट जाएगा। मन की शुद्धि और वासनाओं से मुक्ति के लिए पहले महाकाली की कृपा आवश्यक है।” अम्मा श्री देवी भजन गाती हैं, ‘जय माँ भवानी।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – सीएटल कार्यक्रम

अमृत गंगा S4-59

सीज़न 4, अमृत गंगा की उनसठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “संकल्प लें – प्रेम न भी कर सकूँ, तो घृणा नहीं करूँगा — सबको जैसे हैं वैसे ही स्वीकार करूँगा।” अम्मा श्री कृष्ण भजन गाती हैं, ‘वन्दे नन्दकुमारम।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – सीएटल कार्यक्रम

अमृत गंगा S4-58

सीज़न 4, अमृत गंगा की अठावनवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “पुरुष और स्त्री के गुण अलग होते हैं। पर अधिकांश स्त्रियाँ एक ही समय में अनेक दिशाओं में बहने वाली नदी की तरह, पुरुषों से एक कदम आगे रहती हैं।” अम्मा भजन गाती हैं, मराठी भजन ‘आलो मी माते।’ इस प्रसंग में अम्मा अमेरिका यात्रा का शुभारंभ करती हैं, मार्ग में थाईलैंड प्रवास के साथ।

अमृत गंगा S4-57

सीज़न 4, अमृत गंगा की सत्तावनवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “जन्म देने, पालन-पोषण करने और अंत में संहार करने वाली एक ही दिव्य शक्ति है। इस सत्य को पूरी तरह से समझ लेने से ही मनुष्य जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘सुन ले पुकार।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – त्रिशूर कार्यक्रम।

अमृत गंगा S4-56

सीज़न 4, अमृत गंगा की छप्पनवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “बचपन में सीखे गए आध्यात्मिक मूल्य बीज की तरह जड़ें जमा लेते हैं, इसलिए उन्हें वयस्कता में फलने-फूलने के लिए बचपन में ही बो देना चाहिए।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘रविकुल तिलका।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा में – त्रिशूर कार्यक्रम।