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अमृत गंगा S4-60 सीज़न 4, अमृत गंगा की साठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “मन स्वार्थी और करुणा-रहित है; उसे वश न किया तो जीवन सिर्फ जीभ और पेट तक सिमट जाएगा। मन की शुद्धि और वासनाओं से मुक्ति के लिए पहले महाकाली की कृपा आवश्यक है।” अम्मा श्री देवी भजन गाती हैं, ‘जय माँ […]

अमृत गंगा S4-59 सीज़न 4, अमृत गंगा की उनसठवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “संकल्प लें – प्रेम न भी कर सकूँ, तो घृणा नहीं करूँगा — सबको जैसे हैं वैसे ही स्वीकार करूँगा।” अम्मा श्री कृष्ण भजन गाती हैं, ‘वन्दे नन्दकुमारम।’ अम्मा की अमेरिका यात्रा में – सीएटल कार्यक्रम