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अमृत गंगा 20 अमृत गंगा की बीसवीं कड़ी में, अम्मा हमें चेतावनी दे रही हैं कि हमारा मन हमारे विश्वास और सामर्थ्य को अवरुद्ध करता है। मन प्रेम और क्रोध, दोनों को दृढ़तापूर्वक पकड़ कर, संसार से बंध जाता है। हमें वही भाता है, जो मन को भाता है। अगर हमें कोई अच्छा न लगे […]

प्रश्न – अम्मा, क्या जीवन को दो भागों में बाँटा जा सकता है, भौतिक और आध्यात्मिक? इनमें कौन सा भाग हमें सुख देता है? अम्मा – बच्चों, इन दो भागों को अलग देखने की जरूरत नहीं है। अंतर केवल मानसिक दृष्टिकोण में है। हमें आध्यात्मिकता समझ लेनी चाहिये और उसी के अनुसार जीवन जीना चाहिये, […]