अमृत गंगा 29 अमृत गंगा की उनतीसवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि हम उन समस्याओं से चिपके रहते हैं, जिनका अस्तित्व है ही नहीं और फिर शिकायत करते हैं कि हमसे यह बोझ ढोया नहीं जाता। बोझा उठाने से पहले ही हम शिकायत करने लगते हैं कि बड़ा भारी है! चिंता करने की […]
अध्यतन वार्ता
- हर हाल में साधना की निरंतरता बनाए रखें
- दूसरों के प्रति विचारवान भाव रखें
- संतोष का स्रोत हृदय में है, वस्तुओं में नहीं
- उत्तम आदर्शों से जीवन को अर्थपूर्ण बनाए
- परिवर्तन संसार का स्वभाव है
- जागरुकता ही आध्यात्मिकता का सार है
- मित और हित भाषी बने
- कृपा ईश्वर का स्वरूप
- एक धैर्यवान श्रोता बने
- निःस्वार्थ कर्म तमोगुण को घटाते हैं
When Love is there, distance dosen't matter.
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