अमृत गंगा S4-69 सीज़न 4, अमृत गंगा की उनहत्तरवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “ज्ञान–अज्ञान और धर्म–अधर्म के बीच विवेक जागृत कर अंतर्मन के शिव को प्रकट करने तथा शाश्वत चेतना को अंगीकार करने का आह्वान ही शिवरात्रि है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘व्रजवन कुंजविहारी।’
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अमृत गंगा S2-12 अमृत गँगा सीज़न २ की बारहवीं कड़ी में, अम्मा कह रही हैं कि करुणा हमारा स्वभाव है। दूसरों की सहायता करने का भाव हम में अन्तर्निहित है, किन्तु स्वार्थ-भाव करुणा को प्रकट नहीं होने देता। हम दूसरों के दुःख को जान नहीं पाते। स्वार्थ-भाव हमारे हृदय की करुणा को मलिन कर देता […]

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