Category / उपदेश

एक बार एक व्यक्ति बहुत समय से बेरोजगार था। फिर एक दिन, उसे एक नौकरी के लिए इंटरव्यू हेतु बुलाया गया। अन्त में, उसे यह नौकरी नहीं मिली। हताश-निराश हो कर वह एकान्त-स्थान पर बैठ कर, अपनी ठुड्डी को हथेलियों पर टिकाये सोच में डूब गया। तभी किसी ने उसका कन्धा थपथपाया। पलट कर देखा […]

बच्चो, हम सदा से सुनते आ रहे हैं कि स्त्री निर्बल है। इसका क्या महत्व है? दूसरी जो बात हम प्राचीन काल से सुनते आ रहे हैं वो यह – क्योंकि स्त्री निर्बल है, अतः उसे सदा एक रक्षक की ज़रुरत होती है। सदियों से समाज ने रक्षक की यह भूमिका पुरुष को सौंपी है। […]

अर्जुन एवं कृष्ण गाढ़ मित्रों की भाँति साथ-साथ खेलते-कूदते बड़े हुए। उस समय भगवान् गीतोपदेश नहीं देते थे। परन्तु कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में जब अर्जुन पूर्णतः उद्विग्न हो गया और उसके भीतर का शिष्य जाग उठा, तब अर्जुन ने अपने सारथी-सखा कृष्ण को गुरु रूप में स्वीकार किया। अर्जुन के भीतर शिष्यत्व के […]

बच्चों, भगवद्गीता वेदों का सार है। गीता का संदेश सम्पूर्ण मानवता के लिए है। जिस समय प्रतिकूल परिस्थितियों में अर्जुन अपना कर्तव्य निश्चित न कर पाने के कारण अवसाद ग्रस्त हो गया था, उस समय श्रीभगवान् ने भगवद्गीता के माध्यम से पूरे विश्व को सन्देश दिया था। इसमें भक्ति, ज्ञान, कर्म, योग और कई तरह […]

सभी जीवों में एक भाव सामान्य है, वो है प्रेम। इस मार्ग द्वारा स्त्री-पुरुष परस्पर तथा दोनों प्रकृति को और प्रकृति विश्व को प्राप्त कर सकते हैं। और जो प्रेम सब सीमाओं को तोड़ कर बाहर बह निकलता है वो है – विश्व-मातृत्व । इस धरा पर यदि कोई उत्तम पुष्प खिल सकता है तो […]