Category / अमृतगंगा

अमृत गंगा S4-29 सीज़न 4, अमृत गंगा की उनतीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “जब शिष्य गुरु-वचन मानता है, तो गुरु-कृपा से पूर्णत्व प्राप्त होता है।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘काज करो नित।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा चल पड़ी है पुणे की ओर।

अमृत गंगा S4-28 सीज़न 4, अमृत गंगा की अठाईसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “बचपन से बच्चों को पैसे का मूल्य, परिश्रम और आध्यात्मिक मूल्यों की शिक्षा दें। इससे वे आभारी बनेंगे और समय बर्बाद नहीं करेंगे।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘सुन मेरी मैया।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा चल पड़ी है पुणे की […]

अमृत गंगा S4-27 सीज़न 4, अमृत गंगा की सत्ताईसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “घृणा और ईर्ष्या जैसे दोषों को हटाकर प्रेम, विश्वास और सहयोग को दिल में बसाएं, तब जीवन निरंतर बहती नदी जैसा होगा।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘प्रेम से गाओ।’ प्रस्तुत कड़ी में, अम्मा की भारत यात्रा चल पड़ी है पुणे की ओर।

अमृत गंगा S4-26 सीज़न 4, अमृत गंगा की छबीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “तूफान में बड़े पेड़ गिर जाते हैं, पर छोटे पौधे झुककर बच जाते हैं। यदि हम भी जीवन के अनुभवों को स्वीकारना सीख लें, तो उनसे पार पा सकते हैं।” अम्मा भजन गाती हैं, ‘बीत चला मम।’ अम्मा की भारत यात्रा […]

अमृत गंगा S4-25 सीज़न 4, अमृत गंगा की पचीसवीं कड़ी में, अम्मा कहती हैं, “हर सूर्योदय क्षितिज को, खूबसूरत रंग बिखेर कर अद्भुत मनोरम बना देता है। उसी प्रकार यह नूतन वर्ष आनंद, शांति, प्रेम, समृद्धि, ऐश्वर्य एवं अन्य भौतिक एवं आध्यात्मिक सम्पदाओं की अनूठी सुंदरता हम सब पर बरसाए!” अम्मा गणेश भजन गाती हैं, […]